AMD NEWS: चित्रकूट। धर्मनगरी चित्रकूट में दीपावली के पावन अवसर पर आयोजित होने वाले दीपावली मेले की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। भगवान श्रीराम की तपोभूमि चित्रकूट को दीपोत्सव के लिए भव्य और आकर्षक रूप देने की दिशा में विभिन्न मार्गों और प्रमुख धार्मिक स्थलों पर सजावट का कार्य तेजी से कराया जा रहा है। बेड़ी पुलिया से लेकर रामघाट तक तथा सतना रोड से कामतानाथ प्रथम मुखारविंद होते हुए परिक्रमा मार्ग तक जगह-जगह आकर्षक सजावट की जा रही है। सड़कों पर बड़े-बड़े स्वागत द्वार बनाए जा रहे हैं, जो दीपावली मेले के दौरान श्रद्धालुओं और पर्यटकों के स्वागत का केंद्र बनेंगे।
दीपावली के अवसर पर चित्रकूट में लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की परंपरा रही है। मान्यता है कि भगवान श्रीराम ने अपने वनवास काल का महत्वपूर्ण समय माता सीता और भाई लक्ष्मण के साथ चित्रकूट में बिताया था। यही कारण है कि दीपावली के अवसर पर यहां आने वाले श्रद्धालुओं के लिए इस धार्मिक नगरी का विशेष महत्व है। दीपावली मेले के दौरान मंदाकिनी नदी के तट, रामघाट, कामदगिरि पर्वत और अन्य प्रमुख धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है।
भव्य स्वागत द्वारों से सज रही धर्मनगरी
मेले को आकर्षक स्वरूप देने के लिए बेड़ी पुलिया से रामघाट तक प्रमुख मार्गों पर सजावट का काम किया जा रहा है। इसी तरह सतना रोड से कामतानाथ परिक्रमा मार्ग तक भी बड़े-बड़े प्रवेश एवं स्वागत द्वार बनाए जा रहे हैं। इन द्वारों को आकर्षक रूप देने के लिए विशेष सजावट की जा रही है, ताकि चित्रकूट पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को प्रवेश करते ही उत्सव और आध्यात्मिकता का अनुभव हो सके।
सजावट के इस कार्य में धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को विशेष महत्व दिया जा रहा है। चित्रकूट की पहचान भगवान श्रीराम से जुड़ी हुई है, इसलिए सजावट में रामायण और प्रभु श्रीराम से संबंधित चित्रों एवं धार्मिक प्रतीकों को स्थान दिया जा रहा है।
कामतानाथ प्रथम द्वार पर दीवारों पर उकेरी जा रही भगवान श्रीराम की छवि
दीपावली मेले की तैयारियों के बीच कामतानाथ प्रथम द्वार पर विशेष आकर्षण देखने को मिल रहा है। यहां दीवारों पर भगवान श्रीराम से संबंधित सुंदर चित्रकारी की जा रही है। कलाकार दीवारों पर प्रभु श्रीराम के चित्र उकेर रहे हैं, जिससे इस प्रमुख प्रवेश स्थल को धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से विशेष स्वरूप मिल रहा है।
कामदगिरि पर्वत की परिक्रमा चित्रकूट आने वाले श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। दीपावली मेले के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु कामतानाथ के दर्शन करने और परिक्रमा लगाने पहुंचते हैं। ऐसे में प्रथम द्वार की दीवारों पर की जा रही रामायण आधारित चित्रकारी श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बन सकती है।
धार्मिक पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा
चित्रकूट में दीपावली मेला केवल धार्मिक आयोजन ही नहीं, बल्कि यहां की सांस्कृतिक विरासत, स्थानीय व्यापार और पर्यटन के लिए भी महत्वपूर्ण अवसर होता है। मेले में उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश सहित देश के विभिन्न हिस्सों से श्रद्धालु पहुंचते हैं। श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या से होटल, धर्मशाला, भोजनालय, परिवहन, प्रसाद एवं स्थानीय दुकानदारों को भी रोजगार और व्यापार के अवसर मिलते हैं।
ऐसे में शहर के प्रमुख मार्गों, प्रवेश द्वारों और धार्मिक स्थलों की सुंदर सजावट चित्रकूट की सकारात्मक छवि प्रस्तुत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना भी जरूरी
दीपावली मेले में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए सजावट के साथ-साथ यातायात व्यवस्था, पार्किंग, पेयजल, साफ-सफाई, प्रकाश व्यवस्था, सुरक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं पर भी विशेष ध्यान देना आवश्यक है। प्रमुख मार्गों पर भीड़ का प्रबंधन और परिक्रमा मार्ग में श्रद्धालुओं की सुगम आवाजाही सुनिश्चित करना प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण रहेगा।
कुल मिलाकर दीपावली मेले से पहले चित्रकूट की धर्मनगरी को भव्य स्वरूप देने की तैयारियां तेजी से आगे बढ़ रही हैं। बड़े-बड़े स्वागत द्वार, आकर्षक रोशनी और दीवारों पर भगवान श्रीराम की चित्रकारी के माध्यम से चित्रकूट को राममय बनाने का प्रयास किया जा रहा है। अब श्रद्धालुओं को दीपावली मेले के दौरान सजी-संवरी धर्मनगरी के भव्य स्वरूप को देखने का इंतजार है।

