रेलवे फाटक बंद होने के बाद भी जान जोखिम में डाल रहे लोग, नियम तोड़ने वालों पर सख्ती और चालान की जरूरत

कानपुर। रेलवे क्रॉसिंग पर कुछ मिनट बचाने की जल्दबाजी किसी की जिंदगी पर भारी पड़ सकती है। ट्रेन आने की सूचना मिलते ही जब रेलवे फाटक बंद किया जाता है, तब सभी लोगों से अपेक्षा की जाती है कि वे बैरियर के पीछे सुरक्षित स्थान पर रुकें और ट्रेन गुजरने तथा फाटक पूरी तरह खुलने के बाद ही आगे बढ़ें। इसके बावजूद कई स्थानों पर ऐसे दृश्य देखने को मिलते हैं, जहां कुछ लोग बंद फाटक के अंदर तक पहुंच जाते हैं, बैरियर के बीच या उसके पास खड़े हो जाते हैं अथवा गलत दिशा में वाहन लगाकर रास्ता रोकते हैं।

यह केवल यातायात नियमों की अनदेखी नहीं, बल्कि अपनी और दूसरों की जान को खतरे में डालने वाला व्यवहार है। रेलवे क्रॉसिंग पर इस तरह की लापरवाही को रोकने के लिए नियमित निगरानी, प्रभावी कार्रवाई, नियमानुसार चालान और व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाए जाने की जरूरत है।

बंद फाटक के अंदर पहुंचना क्यों है खतरनाक?

रेलवे फाटक बंद होने का स्पष्ट अर्थ है कि ट्रेन के गुजरने के लिए रास्ता सुरक्षित किया जा रहा है। ऐसे समय में बैरियर पार करना या उसके अंदर जाकर वाहन खड़ा करना गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है।

ट्रेन को अचानक रोकना सामान्य सड़क वाहन की तरह संभव नहीं होता। भारी ट्रेन को रुकने में काफी दूरी लग सकती है। ऐसे में यदि कोई व्यक्ति या वाहन रेलवे ट्रैक पर मौजूद हो, तो दुर्घटना की आशंका बढ़ जाती है। कुछ सेकंड की जल्दबाजी किसी परिवार के लिए जिंदगी भर का दुख बन सकती है।

कई बार लोग यह सोचकर बैरियर पार करने का प्रयास करते हैं कि ट्रेन अभी दूर है या वे जल्दी से निकल जाएंगे। लेकिन ट्रेन की गति और दूरी का गलत अनुमान जानलेवा साबित हो सकता है। रेलवे ट्रैक पर वाहन बंद हो जाना, फंस जाना या अचानक कोई बाधा सामने आना भी गंभीर हादसे का कारण बन सकता है।

गेट के अंदर खड़े होना भी लापरवाही

रेलवे क्रॉसिंग पर केवल बैरियर को पार करना ही समस्या नहीं है। बंद फाटक के अंदर प्रवेश करके ट्रैक के नजदीक खड़े रहना, निर्धारित प्रतीक्षा क्षेत्र से आगे निकलना या दोनों ओर से आने-जाने वाले वाहनों के रास्ते में खड़े होना भी जोखिम बढ़ाता है।

ऐसी स्थिति में ट्रेन के गुजरने के दौरान लोगों को सुरक्षित दूरी बनाए रखने में परेशानी हो सकती है। वहीं, भीड़ और अव्यवस्थित वाहनों के कारण फाटक खुलने के बाद भी जाम लग सकता है। आपातकालीन स्थिति में लोगों के सुरक्षित निकलने का रास्ता भी बाधित हो सकता है।

रेलवे क्रॉसिंग पर अनुशासन का मतलब केवल अपनी सुरक्षा करना नहीं, बल्कि अन्य राहगीरों और वाहन चालकों की सुरक्षा का ध्यान रखना भी है।

गलत दिशा में वाहन खड़ा करने वालों पर भी हो कार्रवाई

रेलवे फाटक बंद होते ही कुछ वाहन चालक जल्दी निकलने की उम्मीद में गलत दिशा में वाहन खड़े कर देते हैं। इससे दूसरी ओर से आने वाले वाहनों का रास्ता बाधित होता है और फाटक खुलने के बाद अव्यवस्था पैदा होती है।

गलत दिशा में खड़े वाहनों के कारण दोपहिया वाहन चालक, साइकिल सवार, पैदल यात्री और अन्य वाहन चालक जोखिम में पड़ सकते हैं। कई बार जल्दबाजी में आगे निकलने की कोशिश से टकराव और जाम की स्थिति बन जाती है।

ऐसे मामलों में यातायात पुलिस और संबंधित अधिकारियों को नियमों के अनुसार कार्रवाई करनी चाहिए। जहां कानून के तहत चालान का प्रावधान लागू होता है, वहां उल्लंघन करने वालों के खिलाफ जुर्माना लगाया जाए। बार-बार नियम तोड़ने वालों पर भी लागू कानूनी प्रावधानों के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।

रेलवे पुलिस और यातायात पुलिस की संयुक्त निगरानी जरूरी

रेलवे क्रॉसिंग पर सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए रेलवे प्रशासन, रेलवे सुरक्षा बल (RPF), राजकीय रेलवे पुलिस (GRP) और स्थानीय यातायात पुलिस के बीच समन्वय उपयोगी हो सकता है। संबंधित क्षेत्राधिकार के अनुसार जिम्मेदार एजेंसियों को संवेदनशील क्रॉसिंग पर नियमित निगरानी करनी चाहिए।

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