कानपुर। अर्मापुर एस्टेट के मैदान में गुरुवार रात मेले के अंतिम दिन बड़ा हादसा होते-होते रह गया। गीली जमीन पर लगा जीरो ग्रेविटी झूला अचानक टूटकर एक तरफ झुक गया। हादसे के वक्त झूले में करीब 35 से 40 लोग सवार थे। झूला अचानक झुकने से उसमें बैठे युवक-युवतियां एक-दूसरे के ऊपर गिर पड़े। इससे मौके पर चीख-पुकार मच गई और पूरे मेले में अफरातफरी का माहौल बन गया।
झूला झुकते ही मची अफरातफरी
प्रत्यक्ष जानकारी के अनुसार, गुरुवार रात मेले के अंतिम दिन बड़ी संख्या में लोग घूमने और झूलों का आनंद लेने पहुंचे थे। इसी दौरान गीली जमीन पर लगा जीरो ग्रेविटी झूला अचानक एक तरफ झुक गया। झूले में सवार लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला और वे एक-दूसरे के ऊपर गिरने लगे। इस घटना के बाद मौके पर मौजूद लोगों में दहशत फैल गई।
हादसे में कई लोगों को अंदरूनी चोटें आने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, घायलों की सही संख्या और उनकी स्थिति की आधिकारिक पुष्टि आवश्यक है।
पुलिस ने कराया रेस्क्यू, मेला परिसर कराया खाली
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची। झूले में फंसे लोगों को बाहर निकलवाया गया। स्थिति को देखते हुए पुलिस ने मेले को बंद कराकर परिसर खाली कराया, ताकि किसी अन्य अप्रिय घटना की आशंका को टाला जा सके।
मेले में सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
इस घटना ने मेले में लगाए गए झूलों की सुरक्षा, उनकी फिटनेस और संचालन व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। गीली जमीन पर भारी झूले का संचालन कितना सुरक्षित था, इसकी जांच जरूरी है। साथ ही, यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि झूले को संचालन की अनुमति देने से पहले उसकी तकनीकी जांच और सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था या नहीं।
मेले में आने वाले लोगों की सुरक्षा सर्वोपरि है। ऐसे आयोजनों में झूलों की नियमित जांच, जमीन की मजबूती, भार क्षमता का पालन और आपातकालीन व्यवस्था सुनिश्चित करना आवश्यक है, ताकि मनोरंजन के लिए पहुंचे लोगों की जान जोखिम में न पड़े।

