कानपुर। बारिश के बाद शहर की कई बस्तियों और निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति लोगों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है। लंबे समय तक जमा पानी के बीच अब दोबारा धूप निकलने और तापमान में उतार-चढ़ाव से मौसम का मिजाज बदल गया है। ऐसे में स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार लोगों को मौसमी बीमारियों और संक्रमण से बचाव को लेकर विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।
जलभराव वाले क्षेत्रों में गंदा पानी जमा रहने से मच्छरों के पनपने की स्थिति बन सकती है। इसके साथ ही दूषित पानी और साफ-सफाई की कमी के कारण डायरिया, उल्टी-दस्त और त्वचा संबंधी संक्रमण जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। वहीं बारिश के बाद अचानक तेज धूप निकलने और उमस बढ़ने से सर्दी-जुकाम, वायरल फीवर, गले में खराश और एलर्जी जैसी मौसमी समस्याएं भी लोगों को परेशान कर सकती हैं।
बस्तियों में बच्चों और बुजुर्गों पर विशेष ध्यान जरूरी
जलभराव और बदलते मौसम का असर बच्चों, बुजुर्गों तथा पहले से कमजोर स्वास्थ्य वाले लोगों पर अधिक पड़ सकता है। ऐसे में अभिभावकों को बच्चों को जमा पानी के संपर्क में जाने से रोकने और घर के आसपास पानी जमा न होने देने की सलाह दी जाती है।
साफ पानी और खान-पान में सावधानी जरूरी
स्वास्थ्य की दृष्टि से जलभराव प्रभावित इलाकों में पीने के पानी की स्वच्छता पर विशेष ध्यान देना जरूरी है। खुले में रखे खाद्य पदार्थों से बचने, पानी को उबालकर या सुरक्षित स्रोत से पीने तथा भोजन से पहले और शौचालय के बाद हाथ अच्छी तरह धोने जैसी सामान्य सावधानियां संक्रमण के जोखिम को कम करने में मदद कर सकती हैं।
मच्छरों से बचाव भी जरूरी
जमा पानी मच्छरों के प्रजनन का कारण बन सकता है। घरों के आसपास पानी जमा न होने दें और जरूरत के अनुसार मच्छरदानी, रिपेलेंट तथा अन्य सुरक्षित उपायों का इस्तेमाल करें। यदि किसी व्यक्ति को लगातार तेज बुखार, अत्यधिक कमजोरी, उल्टी-दस्त, सांस लेने में परेशानी या अन्य गंभीर लक्षण दिखाई दें तो चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।
AMD News की अपील: बारिश के बाद जलभराव वाले इलाकों में नगर निकाय स्तर पर पानी की निकासी, साफ-सफाई और मच्छर नियंत्रण पर विशेष ध्यान दिया जाना जरूरी है। वहीं स्थानीय लोगों से भी अपील है कि वे अपने आसपास स्वच्छता बनाए रखें और किसी भी बीमारी के लक्षण को नजरअंदाज न करें।

