श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के छह दिन बाद मनाई जाने वाली कृष्ण छठी का पर्व आज बुधवार को श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। इस अवसर पर घरों और मंदिरों में भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप यानी लड्डू गोपाल की विशेष पूजा-अर्चना की जाएगी।
कृष्ण छठी के अवसर पर भक्त बाल गोपाल को स्नान कराकर नए वस्त्र पहनाएंगे और उनका विशेष श्रृंगार करेंगे। इसके बाद भगवान को पालने में विराजमान कर पूजा-अर्चना और आरती की जाएगी। कई मंदिरों में भजन-कीर्तन और धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन भी किया जा रहा है।
कढ़ी-चावल और माखन-मिश्री का भोग
कृष्ण छठी पर भगवान को विभिन्न प्रकार के पकवानों का भोग लगाया जाता है। कई स्थानों पर कढ़ी-चावल, खीर, पूड़ी-सब्जी, माखन-मिश्री, फल और मिठाई का भोग अर्पित किया जाता है। पूजा के बाद प्रसाद श्रद्धालुओं में वितरित किया जाता है।
नवजात शिशु की तरह की जाती है सेवा
धार्मिक मान्यता के अनुसार कृष्ण छठी पर बाल गोपाल की उसी तरह सेवा की जाती है, जैसे किसी नवजात शिशु के जन्म के छठे दिन परिवार में छठी का आयोजन किया जाता है। भक्त बाल कृष्ण की बाल लीलाओं का स्मरण करते हुए उनके प्रति वात्सल्य और प्रेम का भाव रखते हैं।
मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो जाता है। शाम को विशेष आरती और भजन-कीर्तन के साथ कृष्ण छठी का उत्सव मनाया जाएगा। भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप की पूजा कर भक्त सुख, समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना करेंगे।
