चित्रकूट। धर्मनगरी चित्रकूट के रामघाट स्थित ऐतिहासिक निर्मोही अखाड़े पर इस बार की भीषण बाढ़ ने गंभीर संकट खड़ा कर दिया है। अखाड़े का परिसर बाढ़ की चपेट में आने के साथ ही वहां स्थित प्रसादालय भवन की हालत बेहद चिंताजनक हो गई है। भवन की दीवारों में जगह-जगह दरारें आने से संतों और श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर भी सवाल खड़े हो गए हैं।
निर्मोही अखाड़े के प्रसादालय में वर्षों से संतों और भक्तों के लिए निशुल्क भोजन एवं प्रसाद की सेवा निरंतर चलती आ रही है। इस सेवा के लिए वर्षभर का अनाज और खाद्य सामग्री परिसर में एकत्रित कर रखी गई थी, लेकिन बाढ़ के पानी ने इस पूरी व्यवस्था को भारी नुकसान पहुंचाया। बड़ी मात्रा में रखा अनाज और खाद्य सामग्री खराब हो चुकी है, जिससे लंबे समय से चल रही निशुल्क सेवा पर भी संकट मंडरा रहा है।
बाढ़ से पहले ही दी जा रही थी चेतावनी, फिर भी नहीं हुआ निरीक्षण
अखाड़े से जुड़े लोगों का कहना है कि यह संकट अचानक पैदा नहीं हुआ। पिछले करीब चार वर्षों से लगातार प्रशासनिक अधिकारियों और संबंधित विभागों को अखाड़े के पास हो रहे कटान की जानकारी दी जाती रही है। नवंबर 2025 से भी जिलाधिकारी, तीर्थ विकास परिषद, पर्यटन विभाग और नगर पालिका सहित संबंधित अधिकारियों को प्रार्थना पत्र देकर स्थिति से अवगत कराया गया कि कटान के चलते निर्मोही अखाड़े का अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है।
आरोप है कि लगातार प्रार्थना पत्र देने के बावजूद समस्या के स्थायी समाधान के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए गए। यहां तक कि संबंधित अधिकारियों द्वारा मौके पर पहुंचकर स्थिति का निरीक्षण तक नहीं किया गया। अब भीषण बाढ़ के बाद भवन में आई दरारों और परिसर को हुए नुकसान ने पुराने खतरे को और गंभीर बना दिया है।
114 वर्षों से अखंड राम नाम, संकट के बीच भी नहीं रुकी साधना
निर्मोही अखाड़े की धार्मिक परंपरा भी अपने आप में विशेष है। अखाड़े के एक परिसर में 114 वर्षों से अखंड राम नाम का पाठ निरंतर चल रहा है। बाढ़ और भवन को हुए नुकसान के बावजूद संतों ने इस आध्यात्मिक परंपरा को रुकने नहीं दिया है। विपरीत परिस्थितियों में भी संत राम नाम का अखंड पाठ जारी रखे हुए हैं।
एक ओर जहां बाढ़ ने भवन और अन्न भंडार को नुकसान पहुंचाया है, वहीं दूसरी ओर संतों की आस्था और सेवा का यह क्रम आज भी जारी है।
रील में विकास, रियल में निर्मोही अखाड़े का संकट!
चित्रकूट में तीर्थ विकास और पर्यटन के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाने और विकास कार्यों के दावे किए जाते रहे हैं। सोशल मीडिया पर चित्रकूट के विकास और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में सहायता की तस्वीरें और वीडियो भी सामने आ रहे हैं। लेकिन निर्मोही अखाड़े की मौजूदा स्थिति इन दावों की जमीनी तस्वीर पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है।
सवाल यह है कि जब वर्षों पहले से कटान की समस्या की जानकारी जिम्मेदार विभागों को दी जा रही थी, तो समय रहते सुरक्षा के इंतजाम क्यों नहीं किए गए? यदि समय रहते निरीक्षण और आवश्यक निर्माण कार्य कराए जाते तो क्या आज अखाड़े की ऐतिहासिक इमारत इस स्थिति में पहुंचती?
सिर्फ भवन नहीं, वर्षों की सेवा और परंपरा भी खतरे में
निर्मोही अखाड़ा सिर्फ एक इमारत नहीं, बल्कि संत परंपरा, धार्मिक आस्था और वर्षों से चल रही सेवा का केंद्र है। यहां आने वाले संतों और श्रद्धालुओं के लिए निशुल्क भोजन की व्यवस्था लंबे समय से की जाती रही है। ऐसे में प्रसादालय भवन को हुआ नुकसान केवल एक भवन को हुई क्षति नहीं, बल्कि वर्षों से चल रही सेवा परंपरा के सामने खड़ा बड़ा संकट है।
अब जरूरत है कि प्रशासन तत्काल मौके का स्थलीय निरीक्षण कराए, भवन की संरचनात्मक सुरक्षा की जांच कराए और कटान को रोकने के लिए स्थायी एवं प्रभावी उपाय करे। साथ ही बाढ़ से खराब हुई खाद्य सामग्री और निशुल्क अन्न सेवा को हुए नुकसान का भी आकलन किया जाए।
निर्मोही अखाड़ा आज मदद का इंतजार कर रहा है। सवाल सिर्फ एक इमारत का नहीं, बल्कि उस परंपरा का है जो वर्षों से संतों और श्रद्धालुओं की सेवा करती आ रही है।
