चित्रकूट। धर्मनगरी चित्रकूट में मंदाकिनी नदी की भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचा दी है। नदी का जलस्तर खतरे के निशान 126 मीटर से करीब नौ मीटर ऊपर यानी 135 मीटर से अधिक पहुंच गया है। बाढ़ का असर सबसे ज्यादा रामघाट क्षेत्र में दिखाई दे रहा है, जहां निर्मोही अखाड़े का पूरा परिसर कई मंजिल तक बाढ़ के पानी में डूब गया है। आश्रम परिसर में मौजूद भवनों, सामान और अन्य संसाधनों को भारी नुकसान पहुंचने की जानकारी सामने आ रही है। प्रारंभिक तौर पर करोड़ों रुपये के नुकसान की आशंका जताई जा रही है।
रामघाट स्थित निर्मोही अखाड़ा परिसर में पानी तेजी से बढ़ने के कारण आश्रम का बड़ा हिस्सा जलमग्न हो गया। कई मंजिलों तक पानी पहुंचने से परिसर की स्थिति बेहद गंभीर बनी हुई है। बाढ़ के तेज बहाव ने आश्रम और आसपास के क्षेत्र में जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। नुकसान का वास्तविक आकलन पानी पूरी तरह उतरने के बाद ही हो सकेगा।
पर्यटक भी बाढ़ में फंसे, हेलीकॉप्टर से रेस्क्यू
मंदाकिनी की बाढ़ में चित्रकूट घूमने आए कई पर्यटक भी फंस गए। भारत घाट और पर्यटक बंगला क्षेत्र में कुछ लोग मकानों और होटलों की ऊपरी मंजिलों में फंसे रहे। विनोद लॉज के पीछे एक मकान में करीब 10 पर्यटकों के फंसे होने की सूचना मिली, जबकि रामघाट गेट नंबर एक के पास होटल पुष्पा में भी कानपुर से आए पर्यटक फंस गए थे।
स्थिति गंभीर होने पर एयरफोर्स के दो हेलीकॉप्टरों की मदद से पर्यटकों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। मंधना-बिठूर से चित्रकूट घूमने आए प्रफुल्ल तिवारी, सानू तिवारी, प्रिंशु तिवारी, विवेक शुक्ला, राजा त्रिवेदी, आलोक बाथम, अन्य लोगों को भी रेस्क्यू कर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया।
रामघाट और मतगजेंद्रनाथ मंदिर क्षेत्र में रेस्क्यू अभियान
बाढ़ का पानी रामघाट क्षेत्र में तेजी से फैलने के कारण मतगजेंद्रनाथ मंदिर और आसपास के मकानों में लोग फंस गए। तेज बहाव के बीच पुलिस, एसडीआरएफ और अन्य राहत दल नावों के जरिए लोगों को सुरक्षित निकालने में जुटे हैं।
चित्रकूट एसडीओपी के नेतृत्व में चित्रकूट थाना पुलिस बाढ़ प्रभावित इलाकों में लगातार पहुंच रही है। परिवारों, बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के साथ ही जरूरतमंदों को भोजन और पानी उपलब्ध कराया जा रहा है।
एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और पीएसी की टीमें तैनात
जिला प्रशासन के अनुसार बाढ़ की स्थिति को देखते हुए एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और पीएसी की करीब 10 टीमें राहत एवं बचाव कार्य के लिए लगाई जा रही हैं। गोबरिया क्षेत्र में भी एसडीआरएफ की टीमें फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने में जुटी हैं।
डीएम पुलकित गर्ग ने बताया कि बाढ़ की आशंका को देखते हुए पहले ही चेतावनी जारी कर दी गई थी। इसके बाद अधिकांश लोगों ने घरों और होटलों को छोड़कर सुरक्षित स्थानों का रुख कर लिया था। हालांकि कुछ लोग ऊपरी मंजिलों पर रह गए थे, जिन्हें एसडीआरएफ की टीमों द्वारा लगातार रेस्क्यू किया जा रहा है।
बारिश रुकी, लेकिन मंदाकिनी का जलस्तर अभी भी चिंता का विषय
चित्रकूट में बारिश रुकने के बावजूद मध्य प्रदेश में हो रही बारिश का असर मंदाकिनी नदी के जलस्तर पर बना हुआ है। डोंडा बांध में पानी का स्तर कम हुआ है, लेकिन प्रशासन लगातार निगरानी कर रहा है।
बाढ़ का पानी कुछ स्थानों पर उतरना शुरू हुआ है, लेकिन खतरा अभी टला नहीं है। पानी कम होने के बाद मिट्टी धंसने, भवनों के कमजोर होने और मकानों के ढहने का खतरा बना हुआ है। रामघाट समेत करीब पांच गांव बाढ़ से प्रभावित बताए जा रहे हैं।
फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता लोगों को सुरक्षित निकालना, प्रभावित परिवारों तक भोजन-पानी पहुंचाना और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में लगातार निगरानी बनाए रखना है। वहीं, रामघाट में निर्मोही अखाड़े के कई मंजिल तक डूबे पूरे परिसर ने बाढ़ की भयावहता को और स्पष्ट कर दिया है। पानी उतरने के बाद आश्रम में हुए नुकसान का विस्तृत आकलन किए जाने की उम्मीद है।
