नई दिल्ली/उत्तर प्रदेश: देश में चीनी की कीमतों में लगातार तेजी देखने को मिल रही है। बाजार में बढ़ते भाव का सीधा असर आम उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ रहा है। कई जगह रिटेल बाजार में चीनी का भाव ₹70 प्रति किलो तक पहुंच गया है, जिससे घरेलू बजट पर अतिरिक्त बोझ बढ़ गया है।
थोक से लेकर रिटेल बाजार तक असर
चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी का असर थोक बाजार के साथ-साथ खुदरा बाजार में भी दिखाई दे रहा है। स्थानीय बाजारों में अलग-अलग ब्रांड और गुणवत्ता के हिसाब से चीनी के भाव अलग हो सकते हैं, लेकिन कई स्थानों पर उपभोक्ताओं को ₹65 से ₹70 प्रति किलो तक कीमत चुकानी पड़ रही है।
क्यों बढ़ रहे हैं चीनी के दाम?
चीनी की कीमतों में तेजी के पीछे उत्पादन में कमी, बाजार में उपलब्धता, बढ़ती मांग और त्योहारों से पहले खपत बढ़ने जैसे कई कारण बताए जा रहे हैं। चीनी उत्पादन में कमी की आशंका के बीच बाजार में उपलब्ध स्टॉक पर दबाव बढ़ा है।
आने वाले त्योहारों के दौरान मिठाई, बेकरी उत्पाद और घरों में बनने वाले पकवानों में चीनी की मांग और बढ़ने की संभावना है। ऐसे में बाजार में कीमतों को लेकर चिंता बनी हुई है।
इथेनॉल और चीनी की कीमतों पर भी चर्चा
चीनी की कीमत बढ़ने के साथ इथेनॉल उत्पादन के लिए गन्ने और चीनी के इस्तेमाल को लेकर भी चर्चा तेज हुई है। हालांकि सरकार की ओर से यह कहा गया है कि मौजूदा तेजी के पीछे केवल इथेनॉल के लिए चीनी का डायवर्जन जिम्मेदार नहीं है। उत्पादन, आपूर्ति और मांग के बीच संतुलन बिगड़ना भी कीमतों में तेजी का प्रमुख कारण है।
सरकार की नजर जमाखोरी पर
बढ़ती कीमतों के बीच सरकार की ओर से बाजार में चीनी की उपलब्धता और स्टॉक पर नजर रखी जा रही है। जमाखोरी और कालाबाजारी रोकने के लिए स्टॉक लिमिट तथा बाजार की निगरानी जैसे कदम उठाए जा रहे हैं। सरकार का प्रयास है कि पर्याप्त आपूर्ति बनाए रखकर कीमतों को नियंत्रित किया जा सके।
आम आदमी की जेब पर सीधा असर
चीनी के दाम बढ़ने का असर सिर्फ चाय और घरेलू रसोई तक सीमित नहीं रहेगा। चीनी महंगी होने से मिठाई, बेकरी उत्पाद, जूस, पेय पदार्थ और अन्य खाद्य वस्तुओं की लागत भी बढ़ सकती है। त्योहारों का सीजन नजदीक होने के कारण मिठाई कारोबारियों और उपभोक्ताओं दोनों की चिंता बढ़ गई है।
