कई बार पेट के दाहिने हिस्से में अचानक तेज दर्द होने पर लोग इसे गैस, अपच या एसिडिटी समझकर सामान्य दवा ले लेते हैं। लेकिन यदि दर्द लगातार बना रहे या बार-बार हो, तो इसे नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। ऐसे लक्षण गॉल ब्लैडर यानी पित्ताशय में पथरी की ओर भी इशारा कर सकते हैं।
गॉल ब्लैडर की पथरी पाचन तंत्र से जुड़ी एक आम समस्या है। कई लोगों में यह पथरी वर्षों तक बिना किसी लक्षण के मौजूद रहती है और किसी अन्य बीमारी की जांच के दौरान अल्ट्रासाउंड में अचानक इसका पता चलता है। वहीं कुछ मरीजों में यही पथरी तेज दर्द, संक्रमण, पीलिया और पैंक्रियाज में सूजन जैसी गंभीर जटिलताओं का कारण बन सकती है।
क्या होता है गॉल ब्लैडर?
गॉल ब्लैडर लिवर के ठीक नीचे स्थित एक छोटी थैलीनुमा संरचना है। इसका मुख्य काम लिवर द्वारा बनाए गए पित्त यानी बाइल को कुछ समय के लिए जमा करना होता है। भोजन, खासकर वसा युक्त भोजन को पचाने में पित्त की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
गॉल ब्लैडर में पथरी क्यों बनती है?
पित्त में मुख्य रूप से कोलेस्ट्रॉल, बाइल सॉल्ट्स और बिलीरुबिन मौजूद होते हैं। जब इनका संतुलन बिगड़ जाता है, तो छोटे-छोटे क्रिस्टल बनने लगते हैं। समय के साथ यही क्रिस्टल बढ़कर पथरी का रूप ले सकते हैं।
पथरी बनने के प्रमुख कारणों में पित्त में अधिक कोलेस्ट्रॉल, गॉल ब्लैडर का ठीक से खाली न होना, बिलीरुबिन का बढ़ना तथा संक्रमण या सूजन जैसी स्थितियां शामिल हैं।
कितने प्रकार की होती है पथरी?
गॉल ब्लैडर की पथरी को मुख्य रूप से तीन श्रेणियों में समझा जाता है—
1. कोलेस्ट्रॉल स्टोन: यह सबसे सामान्य प्रकार की पथरी है।
2. पिगमेंट स्टोन: बिलीरुबिन की मात्रा बढ़ने से बनने वाली इस पथरी का संबंध कुछ लिवर और रक्त संबंधी बीमारियों से हो सकता है।
3. मिश्रित पथरी: इसमें कोलेस्ट्रॉल, कैल्शियम और बिलीरुबिन जैसे पदार्थ शामिल हो सकते हैं।
किन लोगों में बढ़ सकता है खतरा?
गॉल ब्लैडर स्टोन का खतरा महिलाओं, 40 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों और अधिक वजन वाले व्यक्तियों में बढ़ सकता है। गर्भावस्था, मधुमेह, हाई कोलेस्ट्रॉल, परिवार में पथरी का इतिहास, तेजी से वजन कम होना, लंबे समय तक भूखे रहना और अत्यधिक वसायुक्त भोजन भी जोखिम बढ़ाने वाले कारकों में शामिल हैं।
बढ़ती उम्र और खराब जीवनशैली के कारण अब युवाओं में भी यह समस्या देखने को मिल रही है। मोटापा, शारीरिक गतिविधि की कमी और फास्ट फूड का अधिक सेवन इसके जोखिम को बढ़ा सकते हैं।
गॉल ब्लैडर स्टोन के लक्षण क्या हैं?
हर मरीज में लक्षण दिखाई दें, यह जरूरी नहीं है। लेकिन पथरी के कारण समस्या होने पर इनमें से कुछ लक्षण सामने आ सकते हैं—
पेट के ऊपरी दाहिने हिस्से में तेज दर्द
दर्द का पीठ या कंधे तक पहुंचना
वसायुक्त भोजन के बाद दर्द बढ़ना
मतली और उल्टी
बदहजमी
पेट फूलना
गैस या भारीपन महसूस होना
कई बार दर्द अचानक शुरू होकर काफी तेज हो सकता है और कुछ समय तक बना रह सकता है।
इन लक्षणों को बिल्कुल न करें नजरअंदाज
यदि पेट दर्द के साथ बुखार, कंपकंपी, पीलिया, आंखों का पीला पड़ना, पेशाब का गहरा रंग, फीके रंग का मल, लगातार उल्टी या असहनीय पेट दर्द हो, तो तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए।
ऐसे लक्षण पित्त की नली में रुकावट या संक्रमण जैसी गंभीर स्थिति का संकेत हो सकते हैं।
कैसे होती है जांच?
गॉल ब्लैडर की पथरी की जांच में अल्ट्रासाउंड सबसे सामान्य जांचों में से एक है। डॉक्टर जरूरत के अनुसार सीबीसी, लिवर फंक्शन टेस्ट, बिलीरुबिन और अन्य रक्त जांच भी करा सकते हैं।
यदि बाइल डक्ट में पथरी होने का संदेह हो, तो डॉक्टर एमआरसीपी या सीटी स्कैन जैसी जांच की सलाह दे सकते हैं। कुछ परिस्थितियों में ईआरसीपी के जरिए बाइल डक्ट की पथरी निकालने का उपचार भी किया जा सकता है।
क्या हर मरीज को सर्जरी की जरूरत होती है?
नहीं। जिन लोगों में पथरी है लेकिन कोई लक्षण या जटिलता नहीं है, उनमें हर मामले में तत्काल सर्जरी आवश्यक नहीं होती। उपचार का निर्णय पथरी की स्थिति, लक्षण, जटिलताओं और मरीज की समग्र स्वास्थ्य स्थिति को देखकर डॉक्टर करते हैं।
जिन मरीजों में बार-बार दर्द या जटिलताएं होती हैं, उनमें डॉक्टर गॉल ब्लैडर निकालने की सर्जरी (कोलेसिस्टेक्टॉमी) की सलाह दे सकते हैं।
घरेलू नुस्खों से पथरी घुल सकती है?
गॉल ब्लैडर की पथरी को घरेलू नुस्खों या तथाकथित ‘स्टोन क्लीनिंग’ से पूरी तरह खत्म करने के दावों के पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण नहीं हैं। इसलिए बिना डॉक्टर की सलाह के स्वयं इलाज करना या दवाएं लेना जोखिम भरा हो सकता है।
बचाव के लिए क्या करें?
हर मामले में पथरी को रोकना संभव नहीं है, लेकिन स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर जोखिम कम किया जा सकता है।
वजन को स्वस्थ सीमा में रखें।
वजन कम करना हो तो धीरे-धीरे करें।
नियमित रूप से 30–45 मिनट शारीरिक गतिविधि करें।
फल, सब्जियां, साबुत अनाज और फाइबर युक्त भोजन को प्राथमिकता दें।
तली-भुनी और अत्यधिक वसायुक्त चीजों का सेवन सीमित करें।
अत्यधिक चीनी और ट्रांस फैट से बचें।
लंबे समय तक भूखे रहने से बचें।
पर्याप्त पानी पिएं।
मधुमेह और कोलेस्ट्रॉल जैसी स्थितियों को चिकित्सकीय सलाह के अनुसार नियंत्रित रखें।
कब डॉक्टर से संपर्क करें?
अगर पेट के ऊपरी दाहिने हिस्से में बार-बार दर्द होता है, विशेषकर भोजन के बाद, तो इसे केवल गैस या एसिडिटी मानकर लंबे समय तक नजरअंदाज न करें। चिकित्सक से परामर्श लेकर आवश्यक जांच कराना बेहतर है।
ध्यान रखें: गॉल ब्लैडर की पथरी कई बार बिना लक्षण के भी हो सकती है, जबकि कुछ मामलों में यह गंभीर जटिलताओं का कारण बन सकती है। सही समय पर जांच और चिकित्सकीय सलाह से उचित उपचार संभव है।
डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जागरूकता के उद्देश्य से है। यह किसी व्यक्ति के लिए चिकित्सकीय निदान या उपचार का विकल्प नहीं है। तेज या लगातार पेट दर्द, बुखार, पीलिया अथवा लगातार उल्टी होने पर योग्य चिकित्सक से तुरंत संपर्क करें।
