कानपुर। शहर की बेटी विरुपाक्षी पांडेय ने अपनी मेहनत और लगन के दम पर एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। संयुक्त रक्षा सेवा (CDS) परीक्षा में उन्होंने महिला वर्ग में ऑल इंडिया 9वीं रैंक हासिल कर कानपुर का गौरव बढ़ाया है। उनकी इस सफलता के बाद परिवार, शिक्षकों और शुभचिंतकों में खुशी का माहौल है।
पढ़ाई के साथ NCC ने बनाया सेना की ओर रास्ता
विरुपाक्षी ने डीबीएस कॉलेज, गोविंद नगर से एमए इकोनॉमिक्स की पढ़ाई पूरी की। कॉलेज के दौरान वह NCC से भी जुड़ी रहीं। NCC में उन्होंने सीनियर अंडर ऑफिसर की जिम्मेदारी संभाली और ‘C’ प्रमाणपत्र भी हासिल किया।
NCC के अनुभव ने उनके भीतर अनुशासन, नेतृत्व क्षमता और देशसेवा की भावना को और मजबूत किया। इसी दौरान भारतीय सेना में अधिकारी बनने का उनका संकल्प और मजबूत होता गया।
मां के मार्गदर्शन ने दी उड़ान
विरुपाक्षी की सफलता के पीछे उनकी मां रुचि शुक्ला पांडेय की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही। सरकारी स्कूल में शिक्षिका उनकी मां ने बेटी को पढ़ाई के साथ-साथ अन्य गतिविधियों में भी आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया।
विरुपाक्षी के अनुसार, मां ने उन्हें हमेशा चुनौतियों से घबराने के बजाय उनका सामना करने और लक्ष्य प्राप्त होने तक प्रयास जारी रखने की प्रेरणा दी।
दो असफल प्रयासों के बाद भी नहीं मानी हार
CDS परीक्षा में सफलता विरुपाक्षी को पहली बार में नहीं मिली। यह उनका तीसरा प्रयास था। इससे पहले वह दो बार परीक्षा में सफल हुई थीं, लेकिन मेरिट में जगह नहीं बना पाई थीं।
इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और अपनी तैयारी को और मजबूत किया। तीसरे प्रयास में उनकी मेहनत रंग लाई और उन्होंने महिला वर्ग में नौवीं रैंक हासिल कर ली।
अब सेना में अधिकारी बनने की तैयारी
CDS में शानदार प्रदर्शन के बाद विरुपाक्षी का चयन ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी (OTA) के लिए हुआ है। अब उनका लक्ष्य भारतीय सेना में अधिकारी बनकर देश की सेवा करना है।
अपनी उपलब्धि के लिए उन्होंने अपने परिवार के साथ-साथ कॉलेज के शिक्षकों का भी आभार जताया। उन्होंने शिक्षकों संतोष यादव और कॉलेज के प्राचार्य प्रो. अनिल कुमार मिश्रा के मार्गदर्शन को भी अपनी सफलता में महत्वपूर्ण बताया।
युवाओं के लिए बनीं मिसाल
विरुपाक्षी की कहानी उन युवाओं के लिए प्रेरणा है जो प्रतियोगी परीक्षाओं में बार-बार प्रयास के बावजूद सफलता हासिल नहीं कर पाते। उनकी यात्रा यह संदेश देती है कि असफलता मंजिल का अंत नहीं, बल्कि बेहतर तैयारी की शुरुआत हो सकती है।
कानपुर की इस बेटी ने अपनी मेहनत से यह साबित कर दिया कि सही दिशा, अनुशासन और लगातार प्रयास के साथ बड़े से बड़ा लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।
