नई दिल्ली। बदलती जीवनशैली, बढ़ते तनाव और डिजिटल दौर की व्यस्तता के बीच लोग मानसिक सुकून और रचनात्मक अभिव्यक्ति के नए साधनों की तलाश कर रहे हैं। ऐसे समय में मंडला और डॉट मंडला आर्ट तेजी से लोकप्रिय हो रही है। यह कला केवल सुंदर चित्र बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि ध्यान, धैर्य, सकारात्मक सोच और आत्म-अभिव्यक्ति का भी प्रभावी माध्यम मानी जाती है। भारत सहित दुनिया के कई देशों में कलाकार, विद्यार्थी, गृहिणियां और युवा इस कला को सीखकर अपनी प्रतिभा को नई पहचान दे रहे हैं।
‘मंडला’ शब्द संस्कृत भाषा से लिया गया है, जिसका अर्थ है वृत्त या चक्र। भारतीय, बौद्ध और तिब्बती परंपराओं में मंडला का विशेष आध्यात्मिक महत्व रहा है। प्राचीन काल में मंदिरों, धार्मिक अनुष्ठानों और ध्यान की प्रक्रिया में मंडला आकृतियों का उपयोग किया जाता था। समय के साथ इस पारंपरिक कला ने आधुनिक रूप धारण किया और आज यह कैनवास, लकड़ी, पत्थर, मिट्टी के बर्तन, दीवारों और घरेलू सजावटी वस्तुओं पर भी बनाई जा रही है।
डॉट मंडला आर्ट में विशेष उपकरणों की सहायता से छोटे-छोटे रंगीन बिंदुओं को एक निश्चित क्रम में सजाया जाता है। इन बिंदुओं से बनने वाले ज्यामितीय पैटर्न, पुष्प आकृतियां और आकर्षक डिज़ाइन देखने वालों को सहज ही आकर्षित कर लेते हैं। इस कला में धैर्य, एकाग्रता और रंगों के संतुलित प्रयोग का विशेष महत्व होता है।
मनोवैज्ञानिकों और कला विशेषज्ञों का मानना है कि मंडला आर्ट तनाव कम करने और मानसिक संतुलन बनाए रखने में सहायक हो सकती है। जब कोई व्यक्ति लंबे समय तक एकाग्र होकर मंडला बनाता है, तो उसका ध्यान नकारात्मक विचारों से हटकर रचनात्मक प्रक्रिया पर केंद्रित हो जाता है। यही कारण है कि दुनिया के कई देशों में इसे आर्ट थेरेपी के रूप में भी अपनाया जा रहा है। कई स्कूल, कॉलेज और प्रशिक्षण संस्थान विद्यार्थियों को मानसिक स्वास्थ्य और रचनात्मक विकास के लिए मंडला आर्ट से जोड़ रहे हैं।
सोशल मीडिया ने भी इस कला को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है। इंस्टाग्राम, फेसबुक, यूट्यूब और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म पर मंडला और डॉट मंडला आर्ट से जुड़े वीडियो लाखों बार देखे जा रहे हैं। कलाकार अपनी कला के माध्यम से लोगों को प्रेरित कर रहे हैं, वहीं कई कंटेंट क्रिएटर्स इस क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बना चुके हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, मंडला और डॉट मंडला आर्ट आज स्वरोजगार का भी एक प्रभावी माध्यम बनती जा रही है। हस्तनिर्मित पेंटिंग, वॉल डेकोर, कोस्टर, ट्रे, बोतल, क्लॉक, पूजा थाली, गिफ्ट आइटम और अन्य सजावटी उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है। कई कलाकार ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और प्रदर्शनियों के माध्यम से अपनी कलाकृतियों की बिक्री कर अच्छी आय अर्जित कर रहे हैं। महिलाओं और युवाओं के लिए यह घर बैठे रोजगार का एक बेहतर विकल्प भी साबित हो रहा है।
कला विशेषज्ञों का कहना है कि मंडला आर्ट सीखने के लिए किसी विशेष डिग्री की आवश्यकता नहीं होती। नियमित अभ्यास, धैर्य और रचनात्मक सोच के साथ कोई भी व्यक्ति इस कला में निपुण हो सकता है। ऑनलाइन वर्कशॉप, वीडियो ट्यूटोरियल और ऑफलाइन प्रशिक्षण कार्यक्रमों ने इसे सीखना पहले से कहीं अधिक आसान बना दिया है।
आज मंडला और डॉट मंडला आर्ट केवल एक शौक नहीं, बल्कि रचनात्मकता, मानसिक स्वास्थ्य, सांस्कृतिक विरासत और आत्मनिर्भरता का प्रतीक बन चुकी है। रंगों और बिंदुओं से सजी यह अनूठी कला लोगों के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा भरने के साथ-साथ भारतीय कला को वैश्विक पहचान दिलाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में इस कला का दायरा और अधिक बढ़ेगा तथा यह कला प्रेमियों और युवा कलाकारों के लिए नए अवसरों के द्वार खोलेगी।
