कानपुर। बारिश का मौसम जहां एक ओर गर्मी से राहत लेकर आता है, वहीं दूसरी ओर अपने साथ कई प्रकार की मौसमी बीमारियां भी लेकर आता है। इन दिनों शहर और आसपास के क्षेत्रों में वायरल बुखार, सर्दी-जुकाम, खांसी, गले में संक्रमण, डेंगू, मलेरिया, टाइफाइड और पेट संबंधी समस्याओं के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। बदलते मौसम और बढ़ती नमी के कारण बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों पर इसका सबसे अधिक प्रभाव देखने को मिल रहा है।
AMD NEWS की चीफ एडिटर सलोनी तिवारी से विशेष बातचीत में होम्योपैथी चिकित्सक डॉ. प्रिया त्रिवेदी ने बताया कि बारिश के मौसम में छोटी-सी लापरवाही भी बड़ी बीमारी का कारण बन सकती है। यदि समय रहते सावधानी बरती जाए तो अधिकांश मौसमी बीमारियों से आसानी से बचा जा सकता है।
बदलते मौसम में शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता होती है प्रभावित
डॉ. प्रिया त्रिवेदी ने बताया कि मौसम में अचानक बदलाव होने से शरीर को नए वातावरण के अनुसार स्वयं को ढालने में समय लगता है। इस दौरान शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यूनिटी) कुछ हद तक कमजोर हो जाती है, जिससे वायरस और बैक्टीरिया आसानी से शरीर पर हमला कर देते हैं। यही कारण है कि इन दिनों एक ही परिवार के कई सदस्य वायरल संक्रमण की चपेट में आ जाते हैं।
उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति को तेज बुखार, गले में दर्द, लगातार खांसी, शरीर में दर्द, सिरदर्द या अत्यधिक कमजोरी महसूस हो रही हो तो इसे सामान्य मौसम का प्रभाव समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय पर चिकित्सकीय सलाह लेना बेहद आवश्यक है।
वायरल बुखार को हल्के में न लें
डॉ. त्रिवेदी के अनुसार वायरल बुखार सामान्य दिखाई देता है, लेकिन कई बार इसके लक्षण डेंगू, चिकनगुनिया या टाइफाइड जैसी गंभीर बीमारियों से मिलते-जुलते होते हैं। इसलिए यदि बुखार दो से तीन दिन से अधिक बना रहे, बार-बार तेज हो रहा हो या प्लेटलेट्स कम होने जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत जांच करानी चाहिए।
उन्होंने बताया कि स्वयं दवा खरीदकर खाने या बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक लेने की आदत नुकसान पहुंचा सकती है। सही उपचार के लिए विशेषज्ञ चिकित्सक से परामर्श लेना ही सबसे सुरक्षित विकल्प है।
बच्चों और बुजुर्गों को रखें विशेष सुरक्षित
डॉ. प्रिया त्रिवेदी ने बताया कि छोटे बच्चों और बुजुर्गों की प्रतिरोधक क्षमता अपेक्षाकृत कम होती है। इसलिए इनकी देखभाल में अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए। बारिश में भीगने के बाद तुरंत सूखे कपड़े पहनाना, गर्म पेय पदार्थ देना और पर्याप्त आराम कराना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि यदि बच्चों में लगातार बुखार, उल्टी, दस्त, सुस्ती, खाना न खाना या सांस लेने में परेशानी जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत चिकित्सकीय सलाह लें।
साफ पानी और स्वच्छ भोजन है सबसे बड़ा बचाव
बारिश के मौसम में पानी दूषित होने की संभावना बढ़ जाती है। डॉ. त्रिवेदी ने सलाह दी कि हमेशा उबला हुआ या शुद्ध पानी ही पीना चाहिए। बाहर खुले में बिकने वाले कटे फल, चाट, गोलगप्पे, बासी भोजन और अस्वच्छ खाद्य पदार्थों से बचना चाहिए।
उन्होंने बताया कि पेट का संक्रमण भी इस मौसम में तेजी से फैलता है। दूषित भोजन से उल्टी, दस्त, पेट दर्द और फूड पॉइजनिंग जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए घर का ताजा और पौष्टिक भोजन सबसे बेहतर विकल्प है।
मच्छरों से बचाव भी बेहद जरूरी
बारिश के मौसम में जगह-जगह पानी भर जाने से मच्छरों का प्रजनन तेजी से होता है। यही मच्छर डेंगू और मलेरिया जैसी गंभीर बीमारियां फैलाते हैं।
डॉ. त्रिवेदी ने सलाह दी कि घर के आसपास पानी जमा न होने दें। कूलर, गमले, टायर और पानी रखने वाले बर्तनों की नियमित सफाई करें। सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग करें और पूरी बाजू के कपड़े पहनें।
होम्योपैथी भी दे सकती है लाभ
होम्योपैथी चिकित्सक डॉ. प्रिया त्रिवेदी ने बताया कि होम्योपैथी में रोगी की शारीरिक एवं मानसिक स्थिति का समग्र मूल्यांकन कर उपचार किया जाता है। मौसम के अनुसार होने वाले कई प्रकार के वायरल संक्रमण, एलर्जी, बार-बार होने वाले जुकाम और प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में होम्योपैथिक उपचार लाभकारी हो सकता है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी दवा का सेवन केवल योग्य चिकित्सक की सलाह से ही करना चाहिए और स्वयं दवा लेने से बचना चाहिए।
इम्यूनिटी मजबूत रखना सबसे जरूरी
डॉ. त्रिवेदी ने कहा कि मजबूत प्रतिरोधक क्षमता ही अधिकांश बीमारियों से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है। इसके लिए संतुलित भोजन, पर्याप्त नींद, नियमित व्यायाम, योग और प्राणायाम को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाना चाहिए।
उन्होंने लोगों को मौसमी फल, हरी सब्जियां, दालें, अंकुरित अनाज और पर्याप्त मात्रा में पानी लेने की सलाह दी। अत्यधिक तली-भुनी एवं जंक फूड का सेवन कम करना चाहिए।
इन लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें
डॉ. प्रिया त्रिवेदी के अनुसार यदि निम्न में से कोई भी लक्षण दिखाई दें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए—
- तीन दिन से अधिक लगातार बुखार रहना।
- सांस लेने में कठिनाई होना।
- अत्यधिक कमजोरी या चक्कर आना।
- लगातार उल्टी या दस्त होना।
- शरीर पर लाल चकत्ते या दाने निकलना।
- प्लेटलेट्स कम होने की आशंका या रक्तस्राव के लक्षण।
- बच्चों में अत्यधिक सुस्ती या खाना-पीना छोड़ देना।
Note: स्वास्थ्य संबंधी ऑनलाइन परामर्श हेतु होम्योपैथी विशेषज्ञ डॉ. प्रिया त्रिवेदी से संपर्क करें। 📞 8707805733
