चित्रकूट। मध्यप्रदेश के मझगवां एवं आसपास के पहाड़ी क्षेत्रों में हुई मूसलाधार बारिश का असर शुक्रवार को मंदाकिनी नदी पर साफ दिखाई दिया। दोपहर तक नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ते हुए खतरे के निशान से लगभग एक मीटर नीचे पहुंच गया। बढ़ते जलस्तर के कारण रामघाट की सभी सीढ़ियां पानी में डूब गईं, जबकि घाट किनारे स्थित कई दुकानों में भी पानी घुस गया। स्थिति को देखते हुए उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश का प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया तथा नदी तट पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई।
शुक्रवार दोपहर करीब तीन बजे मंदाकिनी नदी का जलस्तर अचानक बढ़ने लगा। बताया गया कि मध्यप्रदेश के पहाड़ी और वन क्षेत्रों में गुरुवार रात हुई भारी बारिश के चलते बड़ी मात्रा में पानी नदी में आ गया। देखते ही देखते रामघाट पर जलस्तर 125.50 मीटर तक पहुंच गया, जिससे पूरा घाट जलमग्न हो गया।
अचानक बढ़े जलस्तर को देखते हुए घाट किनारे दुकान लगाने वाले व्यापारियों ने आनन-फानन में अपना सामान सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया। वहीं, श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों की सुरक्षा के लिए पुलिस एवं अन्य सुरक्षाकर्मियों की तैनाती बढ़ा दी गई। प्रशासन ने नदी के किनारे लोगों की आवाजाही पर भी नजर बनाए रखी।
हालांकि शुक्रवार सुबह के बाद मध्यप्रदेश क्षेत्र में बारिश थमने से दोपहर बाद नदी का जलस्तर धीरे-धीरे घटने लगा। शाम तक मंदाकिनी नदी सामान्य स्तर पर लौट आई, जिससे प्रशासन और स्थानीय लोगों ने राहत की सांस ली।
सिंचाई विभाग के अधिशाषी अभियंता एस.के. प्रसाद ने बताया कि मंदाकिनी नदी का खतरे का निशान 126.500 मीटर निर्धारित है। शुक्रवार को जलस्तर 125.50 मीटर तक पहुंचा, लेकिन खतरे के स्तर को पार नहीं कर सका।
उधर, जिले में दिनभर बादल छाए रहे और कई स्थानों पर हल्की बारिश दर्ज की गई। मौसम विभाग ने आगामी दिनों में भी तेज बारिश की संभावना जताई है। प्रशासन ने नागरिकों और श्रद्धालुओं से अपील की है कि मानसून के दौरान नदी किनारे अनावश्यक रूप से न जाएं तथा प्रशासन द्वारा जारी सुरक्षा निर्देशों का पालन करें।

