कानपुर। कानपुर विद्युत आपूर्ति से जुड़े उपभोक्ताओं के बीच केस्को (KESCO) की ऑनलाइन बिलिंग और स्मार्ट मीटर प्रणाली को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। हाल ही में सामने आए कुछ मामलों में उपभोक्ताओं ने आरोप लगाया है कि ऑनलाइन भुगतान सफल होने और ट्रांजेक्शन रिकॉर्ड उपलब्ध होने के बावजूद भुगतान बिलिंग सिस्टम में अपडेट नहीं हुआ। वहीं, शिकायत दर्ज कराने के बाद बिना समाधान के शिकायत स्वतः बंद होने और “समाधान हो गया” का संदेश मिलने से उपभोक्ताओं की परेशानी और बढ़ गई है।
जानकारी के अनुसार, एक उपभोक्ता ने अपना बिजली बिल ऑनलाइन माध्यम से जमा किया। भुगतान सफल रहा और संबंधित डैशबोर्ड पर तीन ट्रांजेक्शन भी दिखाई दे रहे हैं। इसके बावजूद बिलिंग रिकॉर्ड में भुगतान अपडेट नहीं हुआ। परिणामस्वरूप उपभोक्ता के खाते में बकाया राशि यथावत दिखाई देती रही, जिससे भविष्य में विलंब शुल्क या बिजली आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका बनी हुई है।
इसी प्रकार एक अन्य मामले में स्मार्ट प्रीपेड मीटर का रिचार्ज फरवरी माह में किया गया था। उपभोक्ता का दावा है कि उस रिचार्ज का रिकॉर्ड सिस्टम में अपडेट नहीं हुआ। इसके बाद किए गए अन्य रिचार्ज भी खाते में परिलक्षित नहीं हुए। कई महीनों से भुगतान और रिचार्ज संबंधी जानकारी अपडेट न होने के कारण उपभोक्ता लगातार कार्यालयों के चक्कर लगाने को मजबूर है।
उपभोक्ताओं का कहना है कि उन्होंने संबंधित पोर्टल और हेल्पलाइन के माध्यम से शिकायत दर्ज कराई, लेकिन अपेक्षित समाधान नहीं मिला। आरोप है कि कुछ शिकायतें बिना वास्तविक निस्तारण के स्वतः बंद कर दी गईं और मोबाइल पर “आपकी शिकायत का समाधान कर दिया गया है” का संदेश प्राप्त हो गया। जबकि वास्तविक समस्या जस की तस बनी रही।
विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल भुगतान प्रणाली में ट्रांजेक्शन और बिलिंग डेटा का सही समन्वय अत्यंत आवश्यक है। यदि भुगतान सफल होने के बावजूद उपभोक्ता के खाते में अपडेट नहीं होता, तो इससे उपभोक्ता का विश्वास प्रभावित होता है और अनावश्यक विवाद उत्पन्न हो सकते हैं।
उपभोक्ताओं ने मांग की है कि केस्को अपनी ऑनलाइन बिलिंग, भुगतान समन्वय (Payment Reconciliation) और स्मार्ट मीटर रिचार्ज प्रणाली की तकनीकी जांच कराए। साथ ही, ऐसी शिकायतों का वास्तविक निस्तारण सुनिश्चित किया जाए तथा बिना समाधान के शिकायत बंद करने की प्रक्रिया पर भी रोक लगाई जाए।
इस संबंध में उपभोक्ताओं का कहना है कि यदि तकनीकी खामियों को समय रहते दूर नहीं किया गया, तो बड़ी संख्या में उपभोक्ता गलत बिलिंग, बकाया दिखने और अनावश्यक मानसिक एवं आर्थिक परेशानी का सामना कर सकते हैं।

