बच्चों की छोटी-सी जिज्ञासा बन सकती है बड़ा हादसा: बिजली के स्विच बोर्ड से रखें दूर, अभिभावकों की सतर्कता ही सबसे बड़ी सुरक्षा

घर बच्चों के लिए सबसे सुरक्षित स्थान माना जाता है, लेकिन कई बार यही घर छोटी-सी लापरवाही के कारण गंभीर हादसों का कारण बन जाता है। बच्चों की स्वाभाविक जिज्ञासा उन्हें हर नई चीज़ को छूने, समझने और उसके साथ प्रयोग करने के लिए प्रेरित करती है। यही जिज्ञासा यदि बिजली के स्विच बोर्ड, खुले सॉकेट या विद्युत उपकरणों की ओर बढ़ जाए तो परिणाम बेहद खतरनाक हो सकते हैं।

आज के समय में लगभग हर घर में आधुनिक इलेक्ट्रिकल फिटिंग मौजूद है। मोबाइल चार्जर, एक्सटेंशन बोर्ड, मल्टी-प्लग, खुले तार और स्विच बोर्ड बच्चों की पहुंच में रहते हैं। छोटे बच्चे यह नहीं जानते कि स्विच बोर्ड में उंगली डालना या किसी धातु की वस्तु को सॉकेट में लगाना जानलेवा साबित हो सकता है। यही कारण है कि हर वर्ष बड़ी संख्या में बच्चे बिजली के झटके का शिकार होते हैं। इनमें कई मामलों में गंभीर चोट, स्थायी विकलांगता और यहां तक कि मौत भी हो जाती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि एक से पांच वर्ष तक की आयु के बच्चे सबसे अधिक जोखिम में होते हैं। इस उम्र में वे बिना किसी डर के हर वस्तु को छूने और उसके बारे में जानने की कोशिश करते हैं। यदि घर में सुरक्षा के उचित इंतजाम न हों तो कुछ ही सेकंड में बड़ा हादसा हो सकता है।

बिजली का झटका केवल करंट लगने तक सीमित नहीं रहता। तेज करंट शरीर के अंदरूनी अंगों को नुकसान पहुंचा सकता है। इससे हृदय की धड़कन रुक सकती है, सांस लेने में कठिनाई हो सकती है, गंभीर जलन हो सकती है और कई मामलों में मस्तिष्क पर भी प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए इसे कभी भी सामान्य घटना समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

अभिभावकों की जिम्मेदारी केवल बच्चों को डांटना नहीं बल्कि उन्हें सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना भी है। बाजार में उपलब्ध सेफ्टी कवर, चाइल्ड-प्रूफ सॉकेट और सुरक्षा उपकरणों का उपयोग कर दुर्घटनाओं की संभावना को काफी हद तक कम किया जा सकता है। जिन सॉकेट का उपयोग नहीं हो रहा है, उन्हें हमेशा सेफ्टी कवर से बंद रखें। टूटे हुए स्विच बोर्ड या ढीले तारों को तुरंत बदलवाएं।

विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि बच्चों को बहुत छोटी उम्र से ही बिजली के खतरों के बारे में सरल भाषा में समझाना चाहिए। यदि बच्चा किसी स्विच बोर्ड के पास जाता है तो उसे प्यार से रोकें और बताएं कि यह खेलने की चीज़ नहीं है। केवल “मत छुओ” कहना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसके पीछे का कारण भी समझाना चाहिए ताकि बच्चा भविष्य में स्वयं सावधानी बरते।

घरों में अक्सर मोबाइल चार्जर लगातार प्लग में लगे रहते हैं। कई बार बच्चे चार्जर की पिन निकालने या लगाने की कोशिश करते हैं। यह भी अत्यंत खतरनाक हो सकता है। उपयोग के बाद चार्जर को प्लग से निकाल देना और तारों को व्यवस्थित रखना एक अच्छी आदत है।

बरसात के मौसम में बिजली से जुड़े हादसों का खतरा और बढ़ जाता है। गीले हाथों से स्विच छूना, पानी के पास बिजली के उपकरण रखना या खुले तारों का उपयोग करना गंभीर दुर्घटना का कारण बन सकता है। इसलिए मौसम के अनुसार अतिरिक्त सावधानी बरतना आवश्यक है।

यदि किसी बच्चे को बिजली का झटका लग जाए तो सबसे पहले घबराएं नहीं। सीधे बच्चे को हाथ लगाने की बजाय सबसे पहले बिजली की सप्लाई बंद करें। यदि ऐसा संभव न हो तो किसी सूखी लकड़ी, प्लास्टिक या अन्य गैर-चालक वस्तु की सहायता से बच्चे को बिजली के स्रोत से अलग करें। इसके बाद तुरंत चिकित्सा सहायता प्राप्त करें। यदि बच्चा सामान्य दिखाई दे रहा हो तब भी डॉक्टर से जांच अवश्य कराएं, क्योंकि कई बार अंदरूनी चोटें तुरंत दिखाई नहीं देतीं।

स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में भी बच्चों को विद्युत सुरक्षा के बारे में नियमित रूप से जागरूक किया जाना चाहिए। चित्रों, पोस्टरों, नाटकों और गतिविधियों के माध्यम से बच्चों को सरल तरीके से यह बताया जा सकता है कि बिजली उपयोगी है, लेकिन उससे खेलना कभी सुरक्षित नहीं है।

समाज के स्तर पर भी जागरूकता अभियान चलाने की आवश्यकता है। स्थानीय प्रशासन, बिजली विभाग, विद्यालय, सामाजिक संस्थाएं और मीडिया मिलकर यदि लगातार जनजागरूकता अभियान चलाएं तो अनेक दुर्घटनाओं को रोका जा सकता है। सोशल मीडिया के माध्यम से भी विद्युत सुरक्षा से जुड़े संदेश अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाए जा सकते हैं।

हर माता-पिता को समय-समय पर अपने घर का सुरक्षा निरीक्षण करना चाहिए। यह देखें कि कहीं कोई खुला तार, टूटा हुआ स्विच, ढीला सॉकेट या बच्चों की पहुंच में बिजली का उपकरण तो नहीं है। छोटी-सी सावधानी भविष्य के बड़े हादसे को टाल सकती है।

बच्चे देश का भविष्य हैं और उनकी सुरक्षा हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। घर में सुरक्षित वातावरण, सही जानकारी और अभिभावकों की सतर्कता ही बच्चों को विद्युत दुर्घटनाओं से बचाने का सबसे प्रभावी उपाय है।

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