Kanpur- सत्या हॉस्पिटल में आधुनिक CORI रोबोटिक तकनीक से सफल टोटल नी रिप्लेसमेंट, मरीजों को मिलेगी तेज़ रिकवरी

कानपुर, 28 जून। कानपुर के सत्या हॉस्पिटल में आधुनिक Smith+Nephew CORI Robotic Surgical System के माध्यम से रोबोटिक टोटल नी रिप्लेसमेंट (घुटना प्रत्यारोपण) सर्जरी की सफल शुरुआत की गई है। अस्पताल ने दावा किया है कि इस अत्याधुनिक तकनीक से मरीजों को अधिक सटीक, सुरक्षित और बेहतर परिणाम मिलने के साथ-साथ कम समय में रिकवरी भी संभव होगी।

इस संबंध में आयोजित प्रेस वार्ता में रोबोटिक जॉइंट रिप्लेसमेंट विशेषज्ञ डॉ. अमित कुमार अग्रवाल ने बताया कि CORI रोबोटिक सिस्टम प्रत्येक मरीज की शारीरिक संरचना के अनुसार व्यक्तिगत (पर्सनलाइज्ड) सर्जिकल योजना तैयार करने में सहायता करता है। ऑपरेशन के दौरान यह तकनीक सर्जन को रियल-टाइम (Real-Time) जानकारी उपलब्ध कराती है, जिससे सर्जरी अधिक सटीकता के साथ की जा सकती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह रोबोट स्वयं ऑपरेशन नहीं करता, बल्कि सर्जन के पूर्ण नियंत्रण में कार्य करते हुए उनकी कार्यक्षमता और सटीकता को बढ़ाता है।

डॉ. अग्रवाल ने बताया कि इस तकनीक के माध्यम से सर्जरी कराने वाले मरीजों को कई महत्वपूर्ण लाभ मिलते हैं। इनमें छोटा चीरा लगना, कम रक्तस्राव, आसपास की मांसपेशियों को कम क्षति पहुंचना, फिजियोथेरेपी की आवश्यकता में कमी, जल्दी चलने-फिरने की क्षमता तथा कम समय में सामान्य दिनचर्या और कार्य पर लौटना शामिल है। मरीज को प्राकृतिक घुटने जैसा अनुभव भी मिलता है।

अस्पताल में CORI सिस्टम के माध्यम से पहली सफल रोबोटिक टोटल नी रिप्लेसमेंट सर्जरी 75 वर्षीय शुश्री सतीश सचदेवा की गई। वह लंबे समय से घुटनों की गंभीर समस्या से पीड़ित थीं, जिसके कारण उनका चलना-फिरना अत्यंत कठिन हो गया था। विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम ने सफलतापूर्वक ऑपरेशन किया, जिसके बाद उनकी स्वास्थ्य स्थिति में लगातार सुधार हो रहा है और वह चिकित्सकीय निगरानी में रिकवरी कर रही हैं।

एनेस्थीसिया विशेषज्ञ डॉ. श्याम मोहन शुक्ला ने बताया कि रोबोटिक नी रिप्लेसमेंट सर्जरी के दौरान मरीज के पेन मैनेजमेंट (दर्द नियंत्रण) पर विशेष ध्यान दिया जाता है। आधुनिक एनेस्थीसिया तकनीकों के उपयोग से ऑपरेशन के दौरान मरीज सुरक्षित रहता है तथा सर्जरी के बाद दर्द को प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जाता है। इससे मरीज को जल्द चलने-फिरने में मदद मिलती है, रिकवरी तेज होती है और अस्पताल में भर्ती रहने की अवधि भी कम हो जाती है।

सत्या हॉस्पिटल के निदेशक डॉ. मनीषा अग्रवाल ने कहा कि रोबोटिक तकनीक जॉइंट रिप्लेसमेंट सर्जरी के क्षेत्र में एक नई क्रांति है। इसका उद्देश्य मरीजों को कम दर्द, अधिक सटीक उपचार और बेहतर जीवन गुणवत्ता प्रदान करना है। उन्होंने कहा कि कानपुर एवं आसपास के क्षेत्रों के मरीजों को अब महानगरों जैसी अत्याधुनिक रोबोटिक ऑर्थोपेडिक सर्जरी की सुविधा स्थानीय स्तर पर उपलब्ध होगी।अस्पताल प्रबंधन ने विश्वास जताया कि आने वाले समय में यह तकनीक घुटना प्रत्यारोपण सर्जरी के क्षेत्र में मरीजों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध होगी।

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