लखनऊ / कानपुर । राजधानी लखनऊ में हुए दर्दनाक अग्निकांड ने कई परिवारों की खुशियां छीन लीं। इस हादसे में जान गंवाने वालों में कानपुर के गोविंदनगर निवासी सूरज सिंह और उनके जिगरी दोस्त संयम विज भी शामिल थे। दोनों की मौत की खबर मिलते ही परिवारों में कोहराम मच गया। वर्षों पुरानी दोस्ती के लिए पहचाने जाने वाले इन दोनों युवकों की अंतिम विदाई का दृश्य इतना मार्मिक था कि वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम हो गईं।
बचपन से शुरू हुई दोस्ती, हर पड़ाव पर रहे साथ
परिजनों के अनुसार सूरज सिंह और संयम विज की दोस्ती बचपन से थी। दोनों ने एक साथ पढ़ाई की, साथ स्कूल गए और इंटरमीडिएट तक का सफर भी साथ तय किया। पढ़ाई पूरी करने के बाद दोनों ने एनीमेशन का कोर्स किया। शिक्षा पूरी होने के बाद भी उनकी दोस्ती और साथ नहीं टूटा।
करीब पांच वर्ष पहले दोनों को एक ही दिन लखनऊ स्थित एक मल्टीनेशनल एनीमेशन कंपनी में नौकरी मिली थी। नौकरी मिलने की खुशी दोनों परिवारों ने मिलकर मनाई थी। इसके बाद दोनों राजधानी में रहकर अपने सपनों को साकार करने में जुट गए थे।
परिवार के लोगों का कहना है कि जहां भी सूरज सिंह का नाम लिया जाता था, वहां संयम विज का नाम अपने आप जुड़ जाता था। दोनों की मित्रता इतनी गहरी थी कि लोग उन्हें एक-दूसरे की पहचान मानते थे। किसी ने कल्पना भी नहीं की थी कि जिंदगी भर साथ रहने वाले ये दोस्त एक ही हादसे में दुनिया छोड़ जाएंगे।
परिवार की जिम्मेदारियों का मजबूत सहारा था सूरज
सूरज सिंह अपने परिवार के सबसे बड़े बेटे थे। पिता के निधन के बाद उन्होंने घर की पूरी जिम्मेदारी अपने कंधों पर उठा ली थी। नौकरी के माध्यम से वह परिवार का भरण-पोषण कर रहे थे और अपने छोटे भाई सम्राट की एमबीए की पढ़ाई तथा बहन सौम्या की शिक्षा का खर्च भी उठा रहे थे।
परिजनों ने बताया कि सूरज परिवार की उम्मीदों का केंद्र थे। उनकी मेहनत और जिम्मेदारी के कारण परिवार भविष्य को लेकर आश्वस्त था। लेकिन इस हादसे ने परिवार के सभी सपनों को झकझोर कर रख दिया।
संयम विज के घर भी पसरा मातम
संयम विज के परिवार पर भी दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। जानकारी के अनुसार उनकी दादी का कुछ दिन पहले ही निधन हुआ था और सोमवार को उनका श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित होना था। परिवार उसी की तैयारियों में जुटा था, लेकिन उससे पहले ही संयम की मौत की खबर पहुंच गई।
जिस घर में श्रद्धांजलि सभा की तैयारियां चल रही थीं, वहां अचानक शोक की दूसरी लहर दौड़ गई। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था। परिवार के लोग यह मानने को तैयार नहीं थे कि उनका बेटा अब इस दुनिया में नहीं रहा।
मां की चीख-पुकार ने हर किसी को रुलाया
अस्पताल और घर के बाहर का दृश्य बेहद भावुक कर देने वाला था। सूरज सिंह और संयम विज की माताएं अपने बेटों को याद कर बार-बार बेसुध हो रही थीं। रिश्तेदार और पड़ोसी उन्हें संभालने का प्रयास कर रहे थे, लेकिन उनका दर्द कम नहीं हो पा रहा था।
दोनों परिवारों की महिलाओं और बुजुर्गों का रो-रोकर बुरा हाल था। हर किसी की जुबान पर यही सवाल था कि आखिर इतनी कम उम्र में दोनों युवकों की जिंदगी क्यों छिन गई।
अंतिम यात्रा में उमड़ा जनसैलाब
हादसे की खबर फैलते ही क्षेत्र के लोग बड़ी संख्या में दोनों परिवारों के घर पहुंचे। अंतिम दर्शन के दौरान माहौल पूरी तरह गमगीन था। दोस्तों, रिश्तेदारों और स्थानीय लोगों ने नम आंखों से दोनों युवकों को श्रद्धांजलि अर्पित की।
सूरज सिंह और संयम विज की दोस्ती की चर्चा अंतिम यात्रा में भी होती रही। लोग कहते नजर आए कि दोनों ने जीवन का हर सफर साथ तय किया और अंत में मौत ने भी उन्हें अलग नहीं किया।

