परभणी (महाराष्ट्र), 20 जून। महाराष्ट्र के परभणी जिले के मानवत तालुका स्थित प्रसिद्ध यशवाड़ी देवस्थान में शनिवार को एक दर्दनाक हादसा हो गया। हनुमान मंदिर के गर्भगृह के सामने निर्माणाधीन सभा मंडप (सभा हॉल) की छत अचानक भरभराकर गिर गई, जिससे मंदिर परिसर में मौजूद श्रद्धालुओं के बीच अफरा-तफरी मच गई। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार इस हादसे में 7 श्रद्धालुओं की मौत हो गई, जबकि 32 लोग घायल हुए हैं। घायलों का विभिन्न अस्पतालों में इलाज जारी है।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार हादसे के समय मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे। शनिवार होने के कारण हनुमान मंदिर में दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए भक्तों की भीड़ उमड़ी हुई थी। इसी दौरान निर्माणाधीन सभा मंडप की छत अचानक गिर गई और उसके नीचे कई श्रद्धालु दब गए।
हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन, पुलिस और आपदा राहत दल मौके पर पहुंच गए। राहत एवं बचाव कार्य युद्ध स्तर पर शुरू कर दिया गया। मलबे में फंसे लोगों को निकालने के लिए जेसीबी मशीनों और अन्य उपकरणों की मदद ली जा रही है। घटनास्थल पर कई एंबुलेंस तैनात की गई हैं, जबकि मेडिकल टीमों को भी तत्काल मौके पर बुलाया गया।
घायलों को तत्काल परभणी जिला सामान्य अस्पताल और आसपास के अन्य चिकित्सा केंद्रों में भर्ती कराया गया है। डॉक्टरों की टीम लगातार घायलों के उपचार में जुटी हुई है। कुछ घायलों की हालत गंभीर बताई जा रही है, जिसके चलते मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है।
जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी और पुलिस विभाग के अधिकारी घटनास्थल पर पहुंचकर राहत कार्यों की निगरानी कर रहे हैं। प्रशासन की ओर से हादसे के कारणों की जांच के आदेश दिए गए हैं। प्रारंभिक तौर पर आशंका जताई जा रही है कि निर्माणाधीन ढांचे की मजबूती में कमी या तकनीकी खामी के कारण यह दुर्घटना हुई हो सकती है, हालांकि वास्तविक कारण जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा।
हादसे के बाद मंदिर परिसर में शोक और चिंता का माहौल है। श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों ने घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया है। कई सामाजिक संगठनों और स्वयंसेवकों ने भी राहत कार्यों में सहयोग के लिए आगे आकर मदद शुरू कर दी है।
प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक जानकारी पर ही भरोसा करें। साथ ही मलबे में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए बचाव अभियान लगातार जारी रखा गया है।
यह हादसा एक बार फिर सार्वजनिक स्थलों और धार्मिक परिसरों में चल रहे निर्माण कार्यों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। स्थानीय नागरिकों ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।

