कानपुर का रहस्यमयी जगन्नाथ मंदिर: गुंबद की बूंदें देती हैं मानसून आने का संकेत

कानपुर। उत्तर प्रदेश के कानपुर नगर से करीब 32 किलोमीटर दूर स्थित बेहटा बुजुर्ग गांव का प्राचीन जगन्नाथ मंदिर अपनी अनोखी विशेषताओं और रहस्यमयी मान्यताओं के कारण देशभर में प्रसिद्ध है। सदियों पुराना यह मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि इसे मानसूनी मंदिर” के नाम से भी जाना जाता है। मान्यता है कि मंदिर के गुंबद से टपकने वाली बूंदें मानसून के आगमन और उसकी स्थिति का पूर्व संकेत देती हैं।

भीतरगांव ब्लॉक मुख्यालय से लगभग तीन किलोमीटर दूर स्थित इस मंदिर में हर वर्ष मानसून आने से पहले गुंबद में लगे विशेष पत्थर पर नमी और पानी की बूंदें दिखाई देने लगती हैं। स्थानीय लोगों और मंदिर के पुजारियों का कहना है कि इन बूंदों के आकार और मात्रा से यह अनुमान लगाया जाता है कि आगामी मानसून सामान्य रहेगा या कमजोर।

इस वर्ष भी भीषण गर्मी के बीच मंदिर के गुंबद पर लगा पत्थर भीगने लगा है और उस पर छोटी-छोटी बूंदें दिखाई दे रही हैं, जिससे लोगों में मानसून को लेकर उत्सुकता बढ़ गई है। जगन्नाथ मंदिर अपनी वास्तुकला के कारण भी विशेष महत्व रखता है। यह मंदिर उड़ीसा के प्रसिद्ध जगन्नाथ मंदिरों से अलग शैली में निर्मित है। बाहर से देखने पर इसकी आकृति किसी बौद्ध स्तूप जैसी प्रतीत होती है, जबकि गर्भगृह में भगवान जगन्नाथ की मुख्य प्रतिमा स्थापित है। मंदिर की शिल्पकला नागर शैली की मानी जाती है।

मंदिर में भगवान जगन्नाथ के साथ उनके बड़े भाई बलराम की प्रतिमा भी स्थापित है। इसके अतिरिक्त प्रतिमा के पीछे दशावतार उकेरे गए हैं, जिनमें बुद्ध के स्थान पर बलराम का चित्र अंकित है। इतिहासकारों के अनुसार मंदिर का निर्माण दूसरी से ग्यारहवीं शताब्दी के बीच किसी समय हुआ माना जाता है। वर्तमान में यह मंदिर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा संरक्षित स्मारक है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *