कानपुर शहर में कमिश्नरेट पुलिस ने एक बड़े साइबर ठगी गैंग का पर्दाफाश करते हुए 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इस गिरोह की कार्यप्रणाली इतनी शातिर थी कि इसे जानकर पुलिस के आला अधिकारी भी हैरान रह गए। डीसीपी साउथ दीपेंद्र चौधरी की टीम ने कार्रवाई करते हुए इस पूरे नेटवर्क को बेनकाब किया।
जांच में सामने आया कि आरोपियों ने 24 फर्जी जीएसटी फर्में बना रखी थीं, जिनके जरिए देशभर में ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसी साइबर ठगी से हासिल रकम को म्यूल खातों में ट्रांसफर किया जाता था। पुलिस ने पुख्ता सबूत जुटाने के बाद सोनू शर्मा, सतीश पांडेय और साहिल विश्वकर्मा समेत सभी आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
₹125 करोड़ की हेराफेरी का खुलासा
पुलिस आयुक्त रघुवीर लाल ने बताया कि आरोपियों के पास से 24 फर्जी जीएसटी फर्मों के दस्तावेज और 16 म्यूल खाते बरामद हुए हैं। इन खातों के जरिए अब तक करीब 125 करोड़ रुपये की हेराफेरी सामने आई है। हाल ही में नवी मुंबई में 58 करोड़ रुपये का बड़ा ट्रांजेक्शन किया गया था, जिसमें से पुलिस ने 93 लाख रुपये फ्रीज करवा लिए हैं। हालांकि, अधिकांश रकम आरोपियों ने पहले ही अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर दी थी।
बैंक कर्मियों की मिलीभगत उजागर
इस मामले में चार बैंककर्मियों की संलिप्तता भी सामने आई है। ये कर्मचारी कमीशन के लालच में आरोपियों की मदद करते थे। जब पुलिस बैंकों को डिजिटल अरेस्ट से जुड़े मामलों की जानकारी देती थी, तो ये कर्मचारी तुरंत आरोपियों को अलर्ट कर देते थे, जिससे आरोपी समय रहते खातों से रकम निकाल लेते थे।
फर्जी फर्म और करंट अकाउंट का खेल
आरोपी फर्जी दस्तावेजों के आधार पर जीएसटी फर्में बनाते और बैंकों में करंट अकाउंट खुलवाते थे। इसके बाद बैंक कर्मचारियों को रिश्वत देकर ट्रांजेक्शन लिमिट बढ़वा लेते थे, ताकि बड़ी रकम एक साथ निकाली जा सके। ठगी की रकम इन्हीं खातों में मंगाकर कैश में निकाल ली जाती थी।
फिलहाल पुलिस ने सभी आरोपियों को जेल भेज दिया है और उनके आपराधिक इतिहास व पूरे नेटवर्क की गहन जांच की जा रही है।

