उत्तर प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था में एक बड़ा और सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है। राज्य के 75 जिलों में से 13 जिलों की कमान अब महिला जिलाधिकारियों (DM) के हाथों में है। यह सिर्फ एक आंकड़ा नहीं, बल्कि बदलते सामाजिक और प्रशासनिक दृष्टिकोण का संकेत है, जहां महिलाओं को नेतृत्व की मुख्यधारा में तेजी से जगह मिल रही है। इन महिला आईएएस अधिकारियों की कहानियां संघर्ष, मेहनत, धैर्य और उत्कृष्टता का प्रतीक हैं। इनमें से कई ने कठिन परिस्थितियों का सामना किया, कई बार असफलता झेली, लेकिन अंततः अपनी काबिलियत से शीर्ष स्थान हासिल किया। आज ये अधिकारी नोएडा जैसे औद्योगिक हब से लेकर श्रावस्ती जैसे पिछड़े जिलों तक विकास, कानून-व्यवस्था और जनकल्याण को नई दिशा दे रही हैं।
नोएडा: पहली महिला डीएम मेधा रूपम का नेतृत्व
नोएडा जैसे हाई-प्रोफाइल और औद्योगिक जिले की जिम्मेदारी पहली बार किसी महिला आईएएस को सौंपी गई है। 2014 बैच की मेधा रूपम अगस्त 2025 में यहां की डीएम बनीं। दिल्ली के सेंट स्टीफेंस कॉलेज से इकोनॉमिक्स ऑनर्स करने वाली मेधा न सिर्फ पढ़ाई में अव्वल रहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर की राइफल शूटर भी रह चुकी हैं। प्रशासनिक परिवार से आने वाली मेधा के पिता भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त रह चुके हैं, जबकि उनकी बहन आईआरएस अधिकारी हैं। उनका प्रशासनिक अनुभव बरेली, मेरठ, लखनऊ और कासगंज जैसे जिलों में रहा है। नोएडा में उन्हें उद्योग, श्रम विवाद और कानून-व्यवस्था जैसे जटिल मुद्दों को संतुलित करना है। उनकी नियुक्ति यह दर्शाती है कि सरकार अब बड़े जिलों में भी महिला नेतृत्व पर भरोसा जता रही है।
गोंडा: असफलताओं से सफलता तक प्रियंका निरंजन
2012 बैच की आईएएस प्रियंका निरंजन की कहानी उन युवाओं के लिए प्रेरणा है जो लगातार असफलताओं से जूझ रहे हैं। उन्होंने चार बार असफल होने के बाद 2012 में 20वीं रैंक हासिल की। 2013 में सेवा जॉइन करने के बाद उन्होंने मुजफ्फरनगर, मिर्जापुर, जालौन और बस्ती जैसे जिलों में अहम जिम्मेदारियां निभाईं। 28 जुलाई 2025 को गोंडा की डीएम बनीं प्रियंका अपनी सख्त और परिणाम-उन्मुख कार्यशैली के लिए जानी जाती हैं। वे प्रशासन में अनुशासन और तेजी से निर्णय लेने के लिए मशहूर हैं।
बिजनौर: सख्त प्रशासन के लिए जानी जाती हैं जसजीत कौर
पंजाब के अमृतसर में जन्मी 2012 बैच की आईएएस जसजीत कौर ने 2011 में 291वीं रैंक हासिल कर प्रशासनिक सेवा में प्रवेश किया। सीतापुर, आगरा, उन्नाव और बुलंदशहर जैसे जिलों में काम करने के बाद उन्होंने स्वास्थ्य मिशन और योजना विभाग में भी अहम जिम्मेदारियां संभालीं। 16 जनवरी 2025 से बिजनौर की डीएम बनी जसजीत कौर अपनी कड़ी प्रशासनिक पकड़ और अनुशासन के लिए जानी जाती हैं।
देवरिया: दिव्या मित्तल का ग्लोबल से ग्राउंड तक का सफर
हरियाणा के रेवाड़ी की रहने वाली दिव्या मित्तल ने 2012 में दूसरी कोशिश में 68वीं रैंक हासिल की। खास बात यह है कि उन्होंने और उनके पति दोनों ने लंदन की अच्छी नौकरी छोड़कर भारत लौटने का फैसला किया। उन्होंने मेरठ, गोंडा, कानपुर और बरेली में महत्वपूर्ण पदों पर काम किया है। मार्च 2025 से देवरिया की डीएम के रूप में वे ग्रामीण विकास और बुनियादी सुविधाओं पर खास फोकस कर रही हैं।
बस्ती: कृतिका ज्योत्सना की दृढ़ इच्छाशक्ति
तीन असफल प्रयासों के बाद 2013 में ऑल इंडिया रैंक 30 हासिल करने वाली कृतिका ज्योत्सना की कहानी धैर्य और समर्पण का उदाहरण है।उनके पिता IFS अधिकारी और मां यूपी पीसीएस अधिकारी रही हैं। 28 अक्टूबर 2025 से बस्ती की डीएम के रूप में वे प्रशासनिक सुधार और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर काम कर रही हैं।
बागपत: संवेदनशील प्रशासन का चेहरा अस्मिता लाल
2015 बैच की आईएएस अस्मिता लाल अपनी संवेदनशीलता और सरलता के लिए जानी जाती हैं। एक घटना में उन्होंने एक लंगूर के लिए अपनी कुर्सी छोड़ दी थी, जो उनकी मानवीय सोच को दर्शाता है। 17 जनवरी 2025 से बागपत की डीएम के रूप में वे जनसुनवाई और लोगों से सीधे संवाद पर जोर दे रही हैं।
फतेहपुर: टॉपर निधि गुप्ता वत्स का दमदार प्रदर्शन
2014 में यूपीएससी में तीसरी रैंक हासिल करने वाली निधि गुप्ता वत्स 2015 बैच की आईएएस हैं। उन्होंने बरेली नगर निगम, हरदोई और अमरोहा जैसे जिलों में काम किया है। फतेहपुर की डीएम के रूप में वे शहरी विकास और प्रशासनिक पारदर्शिता पर फोकस कर रही हैं।
महोबा: योजनाओं को जमीन तक पहुंचाने में माहिर ग़ज़ल भारद्वाज
2016 बैच की ग़ज़ल भारद्वाज ने 2015 में ऑल इंडिया रैंक 40 हासिल की। वे सहारनपुर नगर आयुक्त और रामपुर सीडीओ जैसे पदों पर रह चुकी हैं। 21 अप्रैल 2025 से महोबा की डीएम के रूप में वे सरकारी योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए जानी जाती हैं।
श्रावस्ती: नई ऊर्जा के साथ अन्नपूर्णा गर्ग
2016 बैच की अन्नपूर्णा गर्ग ने 19 अप्रैल 2026 को श्रावस्ती की डीएम के रूप में कार्यभार संभाला। वे अपने तेजतर्रार और अनुशासित कामकाज के लिए जानी जाती हैं।
उनका लक्ष्य पिछड़े जिले में विकास की रफ्तार को तेज करना है।
हापुड़: अनुभव के साथ कविता मीना
कविता मीना ने इटावा, भदोही और बहराइच में काम करने के बाद हापुड़ की डीएम के रूप में जिम्मेदारी संभाली है।उनका अनुभव उन्हें एक महत्वपूर्ण जिले को संभालने में सक्षम बनाता है।
अंबेडकर नगर: ईशा प्रिया का प्रशासनिक अनुभव
ईशा प्रिया ने पर्यटन विभाग और कई जिलों में सीडीओ व संयुक्त मजिस्ट्रेट के रूप में काम किया है। अप्रैल 2026 में डीएम बनने के बाद वे विकास और प्रशासनिक सुधार पर काम कर रही हैं।
रायबरेली: सरनीत कौर ब्रोका का टेक्निकल बैकग्राउंड
IIT दिल्ली से इंजीनियरिंग करने वाली सरनीत कौर ब्रोका ने महिला कल्याण और पोषण जैसे क्षेत्रों में अहम योगदान दिया है। उनका फोकस सामाजिक विकास और महिला सशक्तिकरण पर है।
फर्रुखाबाद: डॉक्टर से डीएम बनीं अंकुर लाठर
AIIMS से MBBS करने के बाद डॉक्टर बनीं अंकुर लाठर ने सिविल सेवा के लिए मेडिकल करियर छोड़ दिया। 2016 में 77वीं रैंक हासिल कर IAS बनीं। उनकी कहानी यह बताती है कि करियर बदलने का साहस भी बड़ी सफलता दिला सकता है।

