शहर के प्रमुख इलाकों में यह समस्या आम हो गई है। सुबह से लेकर शाम तक सड़कों के किनारे गाड़ियों की लंबी कतारें देखने को मिलती हैं, जहां पानी की पाइप लगाकर खुलेआम कार और बाइक धोई जा रही हैं। इससे सड़क पर पानी जमा हो जाता है, जिससे फिसलन बढ़ती है और दुर्घटनाओं का खतरा भी बना रहता है।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि इन अवैध वॉशिंग सेंटरों के कारण उन्हें रोजाना परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। सड़क पर खड़ी गाड़ियों के कारण जाम की स्थिति बन जाती है, जिससे लोगों को अपने गंतव्य तक पहुंचने में काफी समय लग जाता है। इसके अलावा, गाड़ियों की धुलाई के दौरान निकलने वाला गंदा पानी नालियों में बहता है, जिससे जल निकासी व्यवस्था भी प्रभावित होती है।
पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह खुले में गाड़ियों की धुलाई से पानी की बर्बादी के साथ-साथ केमिकल युक्त डिटर्जेंट का उपयोग भी पर्यावरण के लिए हानिकारक साबित हो रहा है। ये केमिकल सीधे जमीन और नालियों में मिलकर जल स्रोतों को प्रदूषित कर रहे हैं। यदि इस पर समय रहते रोक नहीं लगाई गई, तो यह समस्या और गंभीर रूप ले सकती है।
नगर निगम और ट्रैफिक विभाग की जिम्मेदारी पर भी सवाल उठने लगे हैं। नियमों के अनुसार, किसी भी सार्वजनिक सड़क या स्थान पर इस तरह का व्यवसाय चलाना अवैध है, लेकिन इसके बावजूद शहर में धड़ल्ले से यह गतिविधियां जारी हैं। कई बार शिकायतें दर्ज होने के बावजूद ठोस कार्रवाई नहीं हो पा रही है, जिससे इन अवैध संचालकों के हौसले बुलंद हैं।
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि इस मामले को गंभीरता से लिया जाए और जल्द से जल्द अवैध वॉशिंग सेंटरों के खिलाफ अभियान चलाकर कार्रवाई की जाए। साथ ही, शहर में व्यवस्थित और लाइसेंस प्राप्त कार वॉशिंग सेंटरों को बढ़ावा दिया जाए, ताकि लोगों को सुविधा भी मिले और व्यवस्था भी बनी रहे।
इस पूरे मामले पर प्रशासन की ओर से अभी तक कोई ठोस बयान सामने नहीं आया है, लेकिन उम्मीद जताई जा रही है कि बढ़ती शिकायतों के मद्देनजर जल्द ही कोई सख्त कदम उठाए जाएंगे। अगर समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में यह शहर की यातायात और पर्यावरण व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है।