एक ऐसा धाम जहाँ रोज पूजा करने आते हैं गुरु द्रोणाचार्य के पुत्र अश्वत्थामा

सलोनी तिवारी : आज आपको ऐसे अनोखे मंदिर के बारे में जानकारी देते हैं जहाँ महाभारत के समय के एक योद्धा प्रतिदिन शिवलिंग का पूजन करने आते हैं  यह योद्धा गुरु द्रोणाचार्य के पुत्र अश्वत्थामा है।

यह पवित्र स्थान उत्तर प्रदेश के कानपुर महानगर के शिवराजपुर में बाबा खेरेश्वर धाम के नाम से स्थित है ऐसा कहा जाता है कि अमर अश्वत्थामा आज भी यहां प्रतिदिन भगवान् शिव की उपासना करने आते हैं। यहाँ के पुजारी जी ने बताया की  यहां शिवलिंग के ऊपर प्रातः जंगली पुष्प और जल, अक्षत, इत्यादि सुबह प्राप्त होता है जबकि नित्य रात्रि में शिवलिंग को स्नान करा स्वच्छ करने के पश्चात मंदिर के पट बंद कर दिए जाते हैं, जब सुबह यहां मंदिर के पट खोले जाते हैं तो पूजा-अर्चना की हुई मिलती है।  ऐसी मान्यता है  कि अश्वत्थामा यहां अब भी हर रोज पूजा करने आते हैं।

मंदिर के अंदर शिवलिंग के अलावा राधा कृष्ण,राम दरबार,दुर्गा जी, आदि देवी – देवताओं की प्रतिमाएं विराजमान हैं।  मंदिर के अंदर एक अखंड ज्योति निरंतर प्रज्वलित रहती हैं।  मंदिर के पास में एक सरोवर भी है। यह सिद्ध धाम है यहाँ पर जो भी मनोकामना लेकर सच्चे मन से प्रभु से प्रार्थना करता है भगवान भोले शंकर उसकी मनोकामनाओं की पूर्ति अवश्य करते हैं। यह मंदिर सरैया घाट (गंगा जी) के समीप है।

सरैया घाट के तट पर एक और प्राचीन शिव मंदिर बना है जिसका नाम नागेश्वर धाम हैं।  ये मंदिर भी कई वर्षों पुराना है।  मंदिर के अंदर भगवान् शंकर शिवलिंग के रूप में विराजमान है। मंदिर के अंदर ऊपर की ओर देवी देवताओं की कला कृतियाँ भी बनी हुई हैं।  ऐसा बताया जाता है कि इस मंदिर का निर्माण राजा सती प्रसाद द्वारा किया गया था।  राजा एक और मंदिर का निर्माण करा रहे थे जो की पूरा होने से पहले उनकी मृत्यु होने के चलते वो मंदिर आज भी अधूरा रह गया है।

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