“क्यों हो इतने आहत – क्यों हो इतने उदास”

क्यों हो इतने आहत
क्यों हो इतने उदास
कहाँ खोजते हो मुझको
जब मैं हूँ तुम्हारे पास ।

रहता हूँ तुम्हारे सपनों में
देखता हूँ तुम्हारी आंखों से
कभी छोड़कर न जाऊँगा
कर लो मुझ पर विश्वास ।

आँखे जब बंद करोगे
पाओगे मुझको खुद में
हूँ हरक्षण पास तुम्हारे
इकबार करो अहसास।

निशब्द भले ही हूँ मैं
इस जग में जाने कब से
लेकिन जब तुम बोलोगे
होगा मेरा आभास ।

तुम याद हो करते जब ही
मैं तब ही आ जाता हूँ
मैं क्षण का नेह नहीं हूँ
मैं जन्मों का नाता हूँ ……..
मैं जन्मों का नाता हूँ ।

रचना : प्रीती सिंह – कानपुर 

 

 

 

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