दुर्गा पूजा में लाल सफेद साड़ी -“देवी आराधना” में होती है महत्वपूर्ण !

बंगाल में नवरात्रि की अलग ही धूम दिखाई देती है लेकिन अब देश में सभी जगहों पर इस उत्सव को बड़े ही धूम धाम से मनाया जाता है। इसी क्रम में आज वाराणसी में “वाराणसी दुर्गोत्सव सम्मिलनी” के 100  वर्ष पूरे होने पर आज पंचमी के दिन सुबह माता रानी की शोभा यात्रा का आयोजन किया गया इसके बाद गरीबों में अन्न एवं वस्त्र का दान दिया गया। वाराणसी दुर्गोत्सव सम्मिलनी की सदस्य नंदिता दत्ता ने अंशिका मीडिया से बात चीत के दौरान बताया कि आज शोभा यात्रा के दौरान महिलायें पारम्परिक परिधान में नज़र आयी। बंगाली महिलायें  परंपरागत तौर पर वाइट एंड रेड बॉर्डर कलर की साड़ी पहनती हैं।
साड़ी के साथ माथे पर लाल बिंदी एवं मांग में सिन्दूर वाला लुक पूरे देश में अपनी अलग पहचान बना चुका है और इस लुक को काफी पसंद किया जाता है। वैसे तो ये साड़ियां दु्र्गा पूजा के दिनों में किसी भी दिन पहनी जा सकती है, लेकिन दुर्गा पूजा के आखिरी दिन यानि दशमी के दिन तकरीबन सभी महिलाएं लाल-सफेद रंग की साड़ी में नजर आती हैं। इसका कारण यह है कि यहां दुर्गा पूजा के दौरान कई तरह के रीति-रिवाज फॉलो किए जाते हैं।  दुर्गा पूजा के दौरान महिलायें परंपरागत  रूप से तैयार होकर माँ दुर्गा की आराधना करती हैं।


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