नई दिल्ली: दिल्ली-एनसीआर के लोगों को बीते दो महीनों से लगातार बढ़ रहे वायु प्रदूषण ने आम जीवन को प्रभावित कर दिया है। राजधानी समेत आसपास के क्षेत्रों में प्रदूषित हवा लोगों को सांस लेने तक में परेशानी खड़ी कर रही है।
प्रदूषण रोकथाम को लेकर कई प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर इन प्रयासों का कोई असर देखने को नहीं मिल रहा। हवा की गुणवत्ता में सुधार की बजाय स्थिति जस की तस बनी हुई है। दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद और ग्रेटर नोएडा का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 300 के पार लगातार दर्ज हो रहा है, जो ‘बहुत खराब’ श्रेणी में आता है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) का कहना है कि AQI 300 से ऊपर पहुंचने पर खुले वातावरण में लंबे समय तक रहने से सांस लेने में तकलीफ़, खांसी, दम फूलना और अन्य श्वसन संबंधी रोगों का खतरा बढ़ जाता है।
वहीं, आने वाले दिनों में भी राहत के आसार बहुत कम हैं। मौसम विभाग के मुताबिक ठंड बढ़ने और हवा की रफ्तार कम होने से हवा में मौजूद प्रदूषक कण और ज्यादा भारी हो जाएंगे, जिससे प्रदूषण स्तर में और बढ़ोतरी होने की संभावना है।
प्रदूषण बढ़ने का सीधा असर अस्पतालों में भी देखा जा रहा है, जहां सांस लेने में समस्या, आंखों में जलन, एलर्जी और अस्थमा के मरीजों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है।
कुल मिलाकर, दिल्ली-एनसीआर के लोगों के लिए इस समय प्रदूषण एक बड़ी आफ़त बन चुका है, और इसके साथ जीने के अलावा कोई विकल्प नजर नहीं आ रहा है। सरकारें अस्थायी उपाय कर रही हैं, लेकिन स्थाई समाधान को लेकर अभी तक ठोस कदम उठते दिखाई नहीं दे रहे।

