सलोनी तिवारी: सर्दियों में ठंड से बचने के लिए कई लोग रात में कमरे के अंदर अंगीठी या कोयला जलाकर सो जाते हैं। यह प्रचलन भले ही पुराना हो, लेकिन बेहद खतरनाक है। चिकित्सकों और अग्निशमन विभाग के अनुसार, बंद कमरे में अंगीठी जलाने से निकलने वाली कार्बन मोनोऑक्साइड गैस कुछ ही मिनटों में शरीर पर घातक असर डाल सकती है और अक्सर लोग बिना किसी चेतावनी के दम घुटने से मौत का शिकार हो जाते हैं।
कैसे लेती है यह धीमी मौत?
अंगीठी में जलते कोयले से अदृश्य, बिना गंध और बिना रंग की कार्बन मोनोऑक्साइड गैस निकलती है।
जब कमरा बंद हो और वेंटिलेशन न हो, तो यह गैस तेजी से कमरे में भरने लगती है।
शरीर में पहुंचकर यह गैस खून में मौजूद ऑक्सीजन की जगह ले लेती है और कुछ ही देर में व्यक्ति बेहोश होकर मौत के मुंह में चला जाता है।
विशेषज्ञों की चेतावनी
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सिरदर्द
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चक्कर
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उल्टी
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सांस फूलना
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अत्यधिक कमजोरी ऐसे शुरुआती लक्षण हैं जिन्हें अक्सर लोग नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन यह कार्बन मोनोऑक्साइड प्वाइजनिंग के संकेत होते हैं।
AMD न्यूज़ की अपील
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कमरे में अंगीठी या कोयला जलाकर कभी भी न सोएं।
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कमरे का वेंटिलेशन हमेशा खुला रखें।
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गैस हीटर या अंगीठी का उपयोग केवल जागते हुए और खुले स्थान में करें।
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सोने से पहले कमरे को पूरी तरह हवादार कर लें।
पिछले दिनों कई हादसे बने सबक
ठंड बढ़ते ही देश के कई हिस्सों से ऐसे मामलों की खबरें आती हैं, जहां परिवार के सभी सदस्य रात में जलती अंगीठी के कारण दम घुटने से बेहोश मिले। कई मामलों में मौत भी हो चुकी है।
लोगों के लिए सलाह
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गैस हीटर, अंगीठी या कोयला इस्तेमाल करते समय सतर्क रहें।
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खिड़की–दरवाजा हल्का खुला रखें।
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अगर कमरे में धुआं, जलन या भारीपन लगे तो तुरंत बाहर निकलें।


