सलोनी तिवारी: दिल्ली धमाके के बाद देश में फैले डर के माहौल का फायदा उठाते हुए साइबर ठग अब नई तरह की ठगी कर रहे हैं। ‘डिजिटल अरेस्ट स्कैम’ ने कई लोगों को आर्थिक और मानसिक रूप से नुकसान पहुंचाया है। ठग खुद को ATS, NIA या अन्य जांच एजेंसियों का अधिकारी बताकर वीडियो/ऑडियो कॉल के जरिए लोगों को डराते हैं और लाखों रुपये वसूले जाते हैं।
ठगी का नया तरीका — ऐसे बनते हैं लोग शिकार
1. अनजान नंबर से कॉल / WhatsApp कॉल
कॉलर ID पर ‘NIA’, ‘ATS’ या ‘Cyber Cell’ लिखा हुआ दिख सकता है।
2. डिजिटल अरेस्ट की धमकी
ठग कहते हैं कि आपका नाम आतंकी गतिविधियों में आया है और आपके खिलाफ “डिजिटल अरेस्ट वारंट” जारी होगा।
3. डराकर पैसे मांगना
कॉलर्स कहते हैं कि आपका बैंक खाता अस्थायी रूप से ‘सुरक्षित खाते’ में शिफ्ट करना होगा।
RTGS के जरिए लाखों रुपये ट्रांसफर करवाए जाते हैं।
कानपुर की सुनीता गौड़ बनी शिकार
दिल्ली धमाके के अगले ही दिन कानपुर की 45 वर्षीय सुनीता गौड़ को कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को NIA अधिकारी बताया और कहा कि उनका नाम एक आतंकी मामले में आया है। डरी हुई सुनीता ने ठग के कहने पर 6 लाख रुपये RTGS कर दिए। बाद में उन्हें एहसास हुआ कि यह पूरा मामला फर्जी था।
‘मुझे लगा असली जांच चल रही है’, – पीड़िता सुनीता गौड़
गोविंदनगर के पंकज चड्ढा को इसी तरह कॉल आया, कॉलर ने ATS अधिकारी बनकर वीडियो कॉल की मांग भी की, लेकिन उन्होंने फोन काट दिया और बच गए। विजयनगर के रिटायर्ड बैंकर सी. के. तिवारी भी समय रहते सतर्क हो गए और ठगी से बच गए।
DCP क्राइम अंजली विश्वकर्मा ने दी चेतावनी
एडिशनल DCP क्राइम अंजली विश्वकर्मा ने बताया— “कोई भी सरकारी एजेंसी ‘डिजिटल अरेस्ट’ नहीं करती।” “ऐसी कोई कॉल आए तो घबराएं नहीं। तुरंत 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं।

