सलोनी तिवारी: चित्रकूट। प्रभु श्रीराम की तपोस्थली चित्रकूट में कार्तिक पूर्णिमा के पावन अवसर पर आस्था और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। बुधवार की सुबह से ही लाखों श्रद्धालु माता सती अनसूया की तपस्थली से उद्गमित मां मंदाकिनी नदी के तट पर पहुंचे और “हर-हर गंगे”, “जय श्रीराम” के जयघोष के साथ पवित्र स्नान कर दीपदान किया।
जैसे ही सूरज की पहली किरण मां मंदाकिनी के जल पर पड़ी, घाटों पर श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे सभी पुण्य स्नान में लीन दिखे। मान्यता है कि कार्तिक पूर्णिमा के दिन पवित्र नदियों में स्नान करने से सारे पाप नष्ट होते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है। पूरे घाट क्षेत्र में भक्ति संगीत, भजन और मंत्रोच्चार की ध्वनियों से वातावरण पवित्र और आलौकिक हो गया।
दीपदान से दमक उठी मंदाकिनी, गूंजे भगवान के जयकारे
स्नान के उपरांत श्रद्धालुओं ने मां मंदाकिनी नदी में दीपदान किया। सैकड़ों दीयों की रोशनी से नदी की लहरें स्वर्णिम आभा से जगमगा उठीं। घाटों पर दीपों की कतारें ऐसी प्रतीत हो रही थीं मानो आकाश के तारे धरती पर उतर आए हों।
भक्तों ने मतगजेंद्रनाथ मंदिर, तोता मुखी हनुमान मंदिर और कामदगिरि पर्वत की परिक्रमा कर भगवान कामतानाथ के दर्शन किए। महिलाएं व्रत और विशेष पूजन-अनुष्ठान कर रही थीं। पूरा चित्रकूट भक्तिभाव से ओतप्रोत दिखा।
कार्तिक पूर्णिमा पर श्रद्धालुओं की इस भीड़ ने एक बार फिर सिद्ध कर दिया कि चित्रकूट न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि भक्ति और अध्यात्म का जीवंत प्रतीक भी है।

