सलोनी तिवारी: हिंदू धर्म में कार्तिक मास का बहुत अधिक महत्व होता है। इस महीने में दीपावली, गोवर्धन पूजा, भाई दूज और छठ पूजा जैसे प्रमुख पर्व मनाए जाते हैं। इन्हीं में से एक महत्वपूर्ण तिथि है अक्षय नवमी, जिसे आंवला नवमी के नाम से भी जाना जाता है। इस वर्ष अक्षय नवमी 31 अक्टूबर 2025, शुक्रवार को मनाई जाएगी।
अक्षय नवमी का महत्व
अक्षय नवमी को पुण्य और सौभाग्य प्रदान करने वाली तिथि माना गया है। धर्मग्रंथों में कहा गया है कि इस दिन किया गया दान-पुण्य, व्रत और पूजा कभी क्षय नहीं होता। ‘अक्षय’ शब्द का अर्थ ही होता है — जो कभी समाप्त न हो। इस दिन आंवले के वृक्ष की पूजा का विशेष विधान है, क्योंकि इसे भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी का प्रिय वृक्ष माना गया है।
अक्षय नवमी 2025 शुभ मुहूर्त
-
नवमी तिथि प्रारंभ: 30 अक्टूबर 2025, सुबह 10:06 बजे
-
नवमी तिथि समाप्त: 31 अक्टूबर 2025, सुबह 10:03 बजे
-
अक्षय नवमी व्रत व पूजा तिथि: 31 अक्टूबर 2025
अक्षय नवमी पर बन रहे शुभ योग
इस वर्ष अक्षय नवमी पर वृद्धि योग और रवि योग का संयोग बन रहा है।
-
वृद्धि योग: सुबह 06:17 से पूरी रात तक रहेगा।
-
रवि योग: पूरे दिन रहेगा।
-
शिववास योग: सुबह 10:03 बजे तक रहेगा।
इन योगों में मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु की आराधना करने से व्यक्ति के जीवन में समृद्धि, धन और सौभाग्य की वृद्धि होती है।
अक्षय नवमी पूजा विधि
-
प्रातः काल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
-
व्रत और पूजा का संकल्प लें।
-
पूजास्थल पर भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा करें।
-
शाम को दोबारा स्नान करें और संध्या काल में आंवले के वृक्ष की पूजा करें।
-
वृक्ष के नीचे दीपक जलाएं, हल्दी, कुमकुम, फूल और जल से पूजन करें।
-
आंवले के पेड़ की 7 बार परिक्रमा करें।
-
वहीं पर भोजन बनाकर भगवान विष्णु और शिवजी को भोग लगाएं, फिर प्रसाद रूप में ग्रहण करें।

