सलोनी तिवारी: सतना, 25 अक्टूबर 2025। पूज्य संत मुरारी बापू द्वारा आज चित्रकूट के अत्रि मुनि आश्रम सती अनुसुइया से “राम यात्रा” का शुभारंभ किया गया। यह पवित्र यात्रा 25 अक्टूबर से 4 नवंबर 2025 तक चित्रकूट से अयोध्या तक राम वन गमन पथ के मार्गों पर निकाली जा रही है।
कार्यक्रम के शुभारंभ अवसर पर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री श्री राजेंद्र शुक्ल ने कहा कि पूज्य संत बापू जी द्वारा प्रभु श्रीराम के वनवास काल के दौरान जिन मार्गों से होकर श्रीराम गुजरे थे, उन्हीं मार्गों से यह “राम यात्रा” प्रारंभ की गई है। उन्होंने कहा कि यह यात्रा भगवान श्रीराम के आदर्श चरित्र को जन-जन तक पहुंचाने का माध्यम बनेगी।
उप मुख्यमंत्री ने कहा —
“भगवान श्रीराम हमारे प्राण हैं, जिनके स्मरण से जीवन धन्य हो जाता है। श्रद्धेय मुरारी बापू जी ने अपना जीवन श्रीराम के आदर्शों को जन-जन तक पहुंचाने में समर्पित किया है।”
श्री शुक्ल ने आगे कहा कि मध्यप्रदेश के चित्रकूट जैसे पावन स्थल से लेकर देशभर में श्रीराम वन गमन मार्ग पर जिन स्थानों पर प्रभु श्रीराम के चरण पड़े हैं, वह धरती आज बहुमूल्य खनिज और अयस्कों से समृद्ध है, जो भारत की आर्थिक प्रगति में योगदान दे रही है। उन्होंने बताया कि यह राम यात्रा रामेश्वरम तक रेल मार्ग से तथा श्रीलंका तक हवाई मार्ग से जाएगी, और फिर अयोध्या में समापन होगा।
पूज्य संत मुरारी बापू ने कहा कि यह श्रीराम यात्रा विशुद्ध रूप से आध्यात्मिक और आत्मिक यात्रा है, जिसे सभी संतों और महापुरुषों का आशीर्वाद प्राप्त है। यह यात्रा सत्य, प्रेम और करूणा की यात्रा है, जो विश्व के कल्याण के लिए आरंभ की गई है।
उन्होंने मध्यप्रदेश सरकार, उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल और आयोजन से जुड़े सभी सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
संत मुरारी बापू के सानिध्य में चित्रकूट धाम रेलवे स्टेशन से 22 कोच वाली विशेष राम यात्रा ट्रेन को रवाना किया गया। यह यात्रा रामेश्वरम तक रेल मार्ग से और आगे श्रीलंका तक हवाई मार्ग से जाएगी। वापसी में राम यात्रा अयोध्या पहुंचेगी।
इस अवसर पर डीआरआई संगठन सचिव अभय महाजन, संत राम हृदय दास, राम यात्रा संयोजक मदन पालीवाल, आईआरसीटीसी की पमिला गुप्ता, बालेन्द्र गौतम सहित देशभर से आए सैकड़ों भक्तजन उपस्थित रहे।
यह राम यात्रा उन सभी स्थलों से होकर गुजरेगी, जहाँ प्रभु श्रीराम ने वनवास काल के दौरान चरण रखे थे, जिससे श्रद्धालुओं को धर्म, संस्कृति और आस्था का जीवंत अनुभव प्राप्त होगा।

