सलोनी तिवारी: नई दिल्ली: हिंदी सिनेमा के मशहूर अभिनेता गोवर्धन असरानी का 84 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके भतीजे अशोक असरानी ने इस दुखद समाचार की पुष्टि की। बताया जा रहा है कि असरानी का निधन लंबी बीमारी के बाद हुआ। वे मूल रूप से जयपुर, राजस्थान के निवासी थे और उन्होंने अपनी शिक्षा सेंट जेवियर्स स्कूल, जयपुर से प्राप्त की थी।
असरानी ने अपने करियर में 350 से अधिक फिल्मों में अभिनय किया और हिंदी सिनेमा के हास्य अभिनय को नई पहचान दी। वे 1970 के दशक में सबसे ज्यादा लोकप्रिय हुए जब उन्होंने एक से बढ़कर एक सुपरहिट फिल्मों में अपनी कॉमिक टाइमिंग से दर्शकों का दिल जीता।
असरानी की यादगार फिल्में
असरानी का नाम आते ही ‘शोले’ फिल्म का सनकी जेलर याद आ जाता है, जिसकी अनोखी डायलॉग डिलीवरी आज भी लोगों के बीच लोकप्रिय है। इसके अलावा वे ‘मेरे अपने’, ‘कोशिश’, ‘बावर्ची’, ‘परिचय’, ‘अभिमान’, ‘चुपके-चुपके’, ‘छोटी सी बात’ और ‘रफू चक्कर’ जैसी फिल्मों में अपनी बहुमुखी भूमिकाओं से दर्शकों के दिलों पर राज करते रहे।
निर्देशन में भी किया प्रयास
सिर्फ अभिनय ही नहीं, असरानी ने निर्देशन में भी अपनी प्रतिभा दिखाई। उन्होंने 1977 की फिल्म ‘चला मुरारी हीरो बनने’ को लिखा, निर्देशित और उसमें अभिनय किया। यह फिल्म उनकी रचनात्मकता का प्रमाण बनी। इसके अलावा उन्होंने ‘सलाम मेमसाब (1979)’ और कई अन्य फिल्मों का भी निर्देशन किया।
गुजराती सिनेमा में भी छोड़ी छाप
असरानी ने गुजराती फिल्मों में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। 1970 और 1980 के दशक में वे कई सफल गुजराती फिल्मों में मुख्य नायक के रूप में नजर आए। उनकी यह यात्रा बताती है कि वे सिनेमा के प्रति कितने समर्पित और बहुआयामी कलाकार थे।
बॉलीवुड और प्रशंसकों में शोक की लहर
असरानी के निधन की खबर से पूरे फिल्म जगत और उनके प्रशंसकों में शोक की लहर है। उन्हें आखिरी बार ‘धमाल फ्रैंचाइज़ी’ जैसी कॉमेडी फिल्मों में देखा गया था, जहां उनके किरदारों ने एक बार फिर हंसी और भावनाओं से दर्शकों को जोड़ दिया।
हिंदी सिनेमा ने आज एक ऐसा अभिनेता खो दिया है, जिसने हास्य और भावनाओं दोनों को समान रूप से जिया। असरानी का योगदान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बना रहेगा।

