वृंदावन स्थित प्रसिद्ध बांके बिहारी मंदिर के गर्भ गृह के पास बने विशेष दरवाजों को धनतेरस (18 अक्टूबर 2025) के दिन 54 साल बाद खोला गया। बताया जा रहा है कि यह दरवाजे 160 साल पुराने खजाने तक पहुंचते हैं, जिसमें सोने-चांदी से भरे कलश होने की संभावना जताई गई है।
सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित हाई पावर्ड कमेटी ने 18 सितंबर को एक विशेष समिति बनाई थी, जिसे इस खजाने को खोलने की जिम्मेदारी दी गई थी। शनिवार को प्रशासनिक अधिकारियों, चार नामित गोस्वामियों और विशेष सुरक्षा टीम की मौजूदगी में यह कपाट खोला गया।
मंदिर के गर्भगृह के नीचे बने इस कमरे को 1971 के बाद पहली बार खोला गया है। बांके बिहारी मंदिर कमेटी के सदस्य दिनेश गोस्वामी के अनुसार, “अभी केवल दरवाजा खोला गया है, अंदर काफी मलबा है और कोई वस्तु अभी तक बाहर नहीं निकाली गई है।”
मंदिर में सोने-चांदी के आभूषण, सोने के कलश, और चांदी के सिक्के होने के दावे लंबे समय से किए जाते रहे हैं। इस दरवाजे को खोलने की वर्षों से मांग उठ रही थी, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने समिति को अधिकार दिया।
खजाने की खोज के दौरान सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा गया —
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टीम ने मास्क और सुरक्षा उपकरण पहनकर प्रवेश किया।
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बिच्छू और सांप जैसे जीव-जंतुओं की आशंका के चलते वन विभाग की टीम और स्नेक कैचर मौजूद रहे।
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विषैली गैस से बचाव के लिए नीम की पत्तियां रखी गईं।
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मेडिकल टीम को भी सतर्क रखा गया।
यह घटना श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों के लिए ऐतिहासिक और धार्मिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि यह बांके बिहारी जी के 160 साल पुराने खजाने के खुलने का साक्षी दिन है।

