नई दिल्ली: कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाने वाला धनतेरस इस वर्ष 18 अक्टूबर 2025 को मनाया जाएगा। यह दिन हर वर्ग के लिए शुभ माना जाता है — चाहे गरीब हो या सम्पन्न, हर कोई इस दिन कोई न कोई वस्तु अवश्य खरीदता है। ज्योतिष के अनुसार यदि खरीददारी राशि अनुसार की जाए और वस्तु को सही दिशा में रखा जाए, तो उसका फल कई गुना बढ़ जाता है।
धनतेरस पर ब्रह्म योग, बुधादित्य योग और पराक्रम योग बन रहे हैं। साथ ही पूर्वाफाल्गुनी और उत्तराफाल्गुनी नक्षत्रों का संगम रहेगा। सूर्य के प्रभावशाली नक्षत्र उत्तराफाल्गुनी का आरंभ शाम 5:09 बजे से होगा। इस दिन शिव अभिषेक, कुबेर, धन्वंतरि और लक्ष्मी जी का पूजन अत्यंत शुभ फलदायी रहेगा।
धनतेरस पूजा और खरीददारी के शुभ मुहूर्त:
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पूजा का शुभ मुहूर्त: शाम 7:16 से रात 8:20 बजे तक
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अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:43 से दोपहर 12:29 बजे तक
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प्रदोष काल: शाम 5:48 से रात 8:20 बजे तक
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वृषभ काल: शाम 7:37 से रात 9:33 बजे तक
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खरीददारी का शुभ समय: दोपहर 12:15 से 1:30 बजे तक एवं 2:30 से 4:15 बजे तक
यमराज के लिए दीपदान विधि: धनतेरस की शाम यमराज के निमित्त दीपदान करने से अकाल मृत्यु का भय समाप्त होता है। इस दिन 13 दीपक मुख्य द्वार पर और 13 दीपक घर के भीतर जलाएं। दक्षिण दिशा की ओर मुख करके दीप प्रज्वलित करें।
दीपदान का शुभ समय: शाम 6:03 से रात 8:35 बजे तक।
राशि अनुसार क्या खरीदें और किस दिशा में रखें:
| राशि | क्या खरीदें | किस दिशा में रखें |
|---|---|---|
| मेष | सोने का सिक्का या बर्तन | दक्षिण दिशा |
| वृषभ | सोने का सिक्का व हल्दी | दक्षिण-पूर्व (अग्निकोण) |
| मिथुन | सोने/चांदी का सिक्का व केशर | उत्तर दिशा |
| कर्क | चांदी के बर्तन व कर्पूर | उत्तर-पश्चिम दिशा |
| सिंह | स्टील के बर्तन, शहद व खजूर | पूर्व दिशा |
| कन्या | रत्न, मोती या स्टील के बर्तन | पूर्व दिशा |
| तुला | चांदी के बर्तन व वस्त्र | दक्षिण-पूर्व दिशा |
| वृश्चिक | तांबे के बर्तन | दक्षिण दिशा |
| धनु | चांदी के आभूषण या सिक्का व परफ्यूम | पूजा स्थल |
| मकर | स्टील/कांसे के बर्तन व स्टेशनरी | पश्चिम दिशा |
| कुंभ | पारे के लक्ष्मी-गणेश या धातु की वस्तु | दक्षिण-पश्चिम दिशा |
| मीन | तांबे के बर्तन, बाल्टी या लोटा | उत्तर-पूर्व दिशा |
डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं पर आधारित है। अंशिका मीडिया किसी भी प्रकार की पुष्टि नहीं करता। किसी भी मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें।

