सलोनी तिवारी: कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी यानी नरक चतुर्दशी को जहां एक ओर भगवान श्रीकृष्ण और यमदेव की पूजा का विधान है, वहीं इस दिन हनुमान जी की उपासना का भी विशेष महत्व माना गया है। दक्षिण भारत में तो इस दिन हनुमान जी की पूजा बड़े ही विधि-विधान से की जाती है। कहा जाता है कि इस दिन हनुमान जी को बूंदी का भोग लगाने और पंचमुखी दीपक जलाने से विशेष फल की प्राप्ति होती है।
हनुमान जी के जन्म को लेकर दो प्रमुख मान्यताएं
हनुमान जी की जन्मतिथि को लेकर दो पौराणिक मान्यताएं प्रचलित हैं—
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चैत्र पूर्णिमा जन्म तिथि:
पौराणिक कथाओं के अनुसार, चैत्र माह की पूर्णिमा को मेष लग्न और चित्रा नक्षत्र में सुबह 6:03 बजे हनुमान जी का जन्म एक गुफा में हुआ था। इस मान्यता के अनुसार, इस दिन हनुमान जयंती मनाई जाती है। -
कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी जन्म तिथि (नरक चतुर्दशी):
वाल्मीकि रामायण के अनुसार, हनुमान जी का जन्म कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी, मंगलवार, स्वाति नक्षत्र और मेष लग्न में हुआ था। इसलिए दक्षिण भारत में नरक चतुर्दशी को हनुमान जी का जन्मदिवस भी कहा जाता है।
नरक चतुर्दशी पर हनुमान जी की पूजा का महत्व
पौराणिक कथा के अनुसार, माता सीता ने इसी दिन हनुमान जी को अमरत्व का वरदान दिया था। यही कारण है कि इस दिन हनुमान जी की आराधना करने से व्यक्ति को साहस, शक्ति और निरोगी जीवन का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
इस दिन भक्त हनुमान जी को प्रसन्न करने के लिए –
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पंचमुखी दीया जलाते हैं।
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बूंदी या चने का भोग लगाते हैं।
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हनुमान चालीसा, बजरंग बाण और सुंदरकांड का पाठ करते हैं।
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संकटों से मुक्ति और नकारात्मक ऊर्जा से रक्षा की कामना करते हैं।
हनुमान जी की पूजा विधि नरक चतुर्दशी पर
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प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
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घर या मंदिर में हनुमान जी की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।
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पंचामृत से अभिषेक करें और लाल फूल, सिंदूर, और चोला चढ़ाएं।
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बूंदी लड्डू या बेसन के लड्डू का भोग लगाएं।
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पंचमुखी दीपक जलाकर हनुमान चालीसा का पाठ करें।
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अंत में भगवान श्रीराम का स्मरण करते हुए आरती करें।
डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं पर आधारित है। अंशिका मीडिया किसी भी प्रकार की पुष्टि नहीं करता। किसी भी मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें।


