सलोनी तिवारी: राजस्थान सरकार ने 11 साल बाद ऊंटों के अंतरराज्यीय परिवहन की अनुमति दे दी है। अब ऊंटों को राज्य से बाहर ले जाने के लिए स्वास्थ्य प्रमाण पत्र, पूर्व अनुमति और वापसी की जानकारी देना अनिवार्य होगा।
राजस्थान का राज्य पशु और “रेगिस्तान का जहाज” कहलाने वाले ऊंट के निर्यात पर यह प्रतिबंध वर्ष 2015 में लगाया गया था। तत्कालीन वसुंधरा सरकार ने विधानसभा में “राजस्थान ऊंट (वध का प्रतिषेध और अस्थायी प्रजनन या प्रवासन का विनियमन) अधिनियम, 2015” पारित करवाकर ऊंट को राज्य पशु घोषित करते हुए इसके वध और अन्य राज्यों में खरीद-बिक्री पर रोक लगा दी थी।
मौजूदा भजनलाल सरकार ने ऊंटों की घटती आबादी और पशुपालकों के हितों को ध्यान में रखते हुए यह प्रतिबंध हटाने का निर्णय लिया है। सरकार का मानना है कि सशर्त निर्यात और प्रवासन की अनुमति से ऊंटपालकों को आर्थिक राहत मिलेगी और ऊंटों के संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।
सरकार की नई शर्तें और नियम
पशुपालन विभाग की अधिसूचना के अनुसार:
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पूर्व अनुमति अनिवार्य – ऊंटों को राज्य से बाहर ले जाने के लिए सक्षम प्राधिकारी से अनुमति लेना जरूरी होगा।
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स्वास्थ्य प्रमाण पत्र – पशु चिकित्सा अधिकारी द्वारा स्वास्थ्य परीक्षण कर प्रमाण पत्र जारी किया जाएगा। बिना प्रमाण पत्र ऊंट का परिवहन अवैध होगा।
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अस्थायी प्रजनन व कृषि उपयोग हेतु अनुमति – ऊंटों को यदि कृषि या प्रजनन कार्य हेतु बाहर ले जाया जाएगा तो उसका स्पष्ट उल्लेख और वापसी तिथि देना आवश्यक होगा।
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निर्धारित समय में वापसी अनिवार्य – तय समय सीमा में ऊंट वापस न लाने पर अनुमति स्वतः निरस्त हो जाएगी।
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विशेष अनुमति – अधिनियम की धारा 15 (7) के तहत कृषि और शैक्षणिक प्रयोगों के लिए विशेष अनुमति दी जा सकेगी।
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पूरा विवरण जरूरी – ऊंट का उपयोग कहां और किस उद्देश्य के लिए होगा, यह विवरण अनुमति पत्र में दर्ज करना होगा।
नियम उल्लंघन पर सजा और जुर्माना
राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई नियमों का उल्लंघन करता है तो राजस्थान ऊंट अधिनियम 2015 के तहत कार्रवाई की जाएगी।
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ऊंट वध पर 7 साल तक की सजा होगी।
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अवैध परिवहन और तस्करी पर 6 माह से 3 साल तक की सजा और ₹3,000 से ₹25,000 तक का जुर्माना लगाया जाएगा।


