सलोनी तिवारी: कानपुर। नवरात्र और दशहरे का पर्व आते ही पूरे शहर में रावण दहन की तैयारियां जोरों पर हैं। जगह-जगह सड़कों, चौक-चौराहों और बाजारों में रावण, मेघनाथ और कुंभकर्ण के पुतले बिक्री के लिए सज गए हैं। छोटे आकार के पुतले जहां 100 रुपये से शुरू हो रहे हैं, वहीं बड़े और आकर्षक पुतलों की कीमत 7000 रुपये तक जा पहुंची है। कुछ विशेष ऑर्डर पर बने विशाल पुतले इससे भी ज्यादा कीमत पर बेचे जा रहे हैं।
बच्चों और युवाओं में छोटे पुतलों की मांग ज्यादा देखी जा रही है, जिन्हें लोग घरों या मोहल्लों में छोटे स्तर पर दहन के लिए खरीद रहे हैं। वहीं, बड़े मैदानों और संस्थागत कार्यक्रमों में विशाल आकार के पुतलों का उपयोग होगा, जिनकी ऊंचाई 10 से 30 फीट तक है।
कानपुर के कारीगर बताते हैं कि इस बार रंग-बिरंगे और पर्यावरण के अनुकूल पुतलों की मांग बढ़ी है। खास बात यह है कि रावण के पुतलों में अब LED लाइट्स और आतिशबाजी का भी इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे दशहरे की रात और भी आकर्षक दिखेगी।
पुतला बनाने वाले कारीगरों के अनुसार, हर साल दशहरे से पहले लगभग दो महीने पहले से तैयारी शुरू कर दी जाती है। बांस, कपड़ा, कागज और गत्ते से बने इन पुतलों को सजाने में काफी मेहनत लगती है। इस बार बाजार में बिक रहे पुतलों की ऊंचाई 3 फीट से लेकर 30 फीट तक है।
स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि इस सीजन में पुतलों की बिक्री से अच्छी कमाई होती है और हजारों परिवारों की रोज़ी-रोटी इसी पर निर्भर करती है।
दशहरा उत्सव न केवल बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है, बल्कि यह शहर के कारीगरों और व्यापारियों के लिए भी खुशियों और कमाई का अवसर लेकर आता है।


