सलोनी तिवारी: इस वर्ष Sharad Purnima 2025 आश्विन माह की पूर्णिमा को 6 और 7 अक्टूबर के बीच मनाई जाएगी। पूर्णिमा की रात चंद्रमा का पूर्ण प्रकाश पृथ्वी पर पड़ता है, और इसे विशेष रूप से “कृष्णपक्ष की पूर्णिमा” भी कहा जाता है।
शुभ मुहूर्त
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पूजन प्रारंभ: शाम 6:30 बजे
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पूजन समाप्ति: सुबह 5:00 बजे
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सबसे उत्तम समय (शुभ मुहूर्त): रात 10:00 बजे से 12:00 बजे तक
विशेष जानकारी
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शरद पूर्णिमा की रात को चाँदनी सबसे साफ और उज्ज्वल दिखाई देती है।
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इसे कृष्ण भगवान और देवी लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए शुभ माना जाता है।
Sharad Purnima पूजन विधि
शरद पूर्णिमा पर रातभर चंद्रमा की पूजा और भोग अर्पित करना खास महत्व रखता है। यहाँ पूजन की स्टेप-बाय-स्टेप विधि दी गई है:
1. तैयारी
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स्वच्छ स्थान चुनें और मीडियम आकार का मंडप बनाएं।
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सफेद वस्त्र पहनें और पूजा के लिए हल्का स्नान कर लें।
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पूजा की सामग्री तैयार करें: दीपक, अगरबत्ती, पुष्प, फल, चंदन, मिश्री, दूध, शहद और मिठाई।
2. देवी-देवताओं की स्थापना
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पूजा स्थल पर चंद्रमा की तस्वीर या प्रतिमा रखें।
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यदि संभव हो तो लक्ष्मी माता और भगवान कृष्ण की भी स्थापना करें।
3. पूजा मंत्र
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चंद्रमा की आराधना के लिए निम्न मंत्र का जाप करें:
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“ॐ चंद्राय नमः”
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या “ॐ सोमाय नमः”
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4. भोग अर्पण
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शरद पूर्णिमा पर ठंडा दूध, मिश्री और केसर चंद्रमा को अर्पित करें।
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पारंपरिक लोककथाओं में कहा गया है कि चंद्रमा की चांदनी में रखा दूध और मिठाई स्वास्थ्य और आयुर्वेदिक लाभ देती है।
5. रातभर जागरण
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पूर्णिमा की रात जागरण करना शुभ माना जाता है।
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भजन, कीर्तन और मंत्र जाप करके आध्यात्मिक ऊर्जा बढ़ाई जा सकती है।
6. विशेष ध्यान
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दूध, मिठाई और भोग का सेवन सुबह करें।
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इस दिन व्रत या उपवास रखना भी अत्यंत शुभ माना जाता है।
शरद पूर्णिमा का धार्मिक महत्व
शरद पूर्णिमा का महत्व कई पुराणों और धार्मिक कथाओं में वर्णित है।
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कृष्ण भगवान से संबंधित – शरद पूर्णिमा को भगवान कृष्ण के रासलीला और चंद्रमा की उपस्थिति के लिए विशेष माना गया है।
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देवी लक्ष्मी की कृपा – इस दिन धन, समृद्धि और सुख-समृद्धि की प्राप्ति के लिए लक्ष्मी पूजा की जाती है।
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अन्न और स्वास्थ्य – दूध और मिठाई को चंद्रमा की किरणों में रखने से आयुर्वेदिक दृष्टि से लाभकारी माना गया है।
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आध्यात्मिक लाभ – जागरण और भजन करने से मानसिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक उन्नति होती है।
शरद पूर्णिमा और स्वास्थ्य लाभ
आयुर्वेद के अनुसार, शरद पूर्णिमा की रात को चंद्रमा की किरणों में रखा दूध और मिश्री सेहत के लिए अत्यंत लाभकारी होता है।
स्वास्थ्य लाभ:
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इम्युनिटी बढ़ाता है – दूध में प्रोटीन और मिश्री में मिनरल्स मिलकर शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं।
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नींद में सुधार – रातभर जागरण के बाद सुबह चंद्रमा की भोग सामग्री का सेवन नींद और मानसिक शांति देता है।
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फर्टिलिटी और हार्मोनल स्वास्थ्य – मिश्री और दूध हार्मोन संतुलन बनाए रखने में मदद करते हैं।
लोककथाएँ और मान्यताएँ
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कहा जाता है कि शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा से निकलने वाली ऊर्जा सबसे शक्तिशाली होती है।
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शरद पूर्णिमा पर दूध, मिठाई और फलों का सेवन करने से सभी मनोकामनाएँ पूरी होती हैं।
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कुछ क्षेत्रों में इसे “कृष्णजन्मोत्सव” के रूप में भी मनाया जाता है।
Sharad Purnima 2025 न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि स्वास्थ्य और आध्यात्मिक उन्नति के लिए भी अत्यंत लाभकारी है। इस दिन चंद्रमा की पूजा, जागरण और भोग अर्पित करना शुभ माना जाता है।
इस पवित्र दिन का पूर्ण लाभ उठाने के लिए:
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सही तिथि और शुभ मुहूर्त का ध्यान रखें
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पूजा सामग्री और विधि का पालन करें
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रातभर जागरण और भजन करें
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सुबह भोग और मिठाई का सेवन करें
डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं पर आधारित है। अंशिका मीडिया किसी भी प्रकार की पुष्टि नहीं करता। किसी भी मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें।


