सलोनी तिवारी: उत्तर प्रदेश (UP) में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (MNREGS) यानी मनरेगा ने इस वित्तीय वर्ष में नया रिकॉर्ड बनाया है। महिलाओं की भागीदारी 42.31% तक पहुंच गई है, जो पहले के आंकड़ों से कहीं अधिक है। यह बदलाव केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दर्शाता है कि अब ग्रामीण महिलाएं रोजगार, आत्मनिर्भरता और सामाजिक बदलाव की धारा में पहले से अधिक मज़बूती से जुड़ रही हैं।
भारत सरकार ने MNREGS को ग्रामीण भारत में आजीविका सुरक्षा और विकास के उद्देश्य से शुरू किया था। लेकिन उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी यह साबित करती है कि योजना का असर सिर्फ रोज़गार तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक सशक्तिकरण और आर्थिक आज़ादी की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
1. MNREGS (मनरेगा) क्या है?
मनरेगा भारत सरकार की एक महत्वाकांक्षी योजना है, जिसे 2005 में लागू किया गया। इसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले गरीब परिवारों को न्यूनतम 100 दिनों का रोज़गार उपलब्ध कराना है।
-
यह योजना श्रम आधारित कार्यों पर आधारित है।
-
इसमें पंचायतों के माध्यम से स्थानीय स्तर पर सड़क, तालाब, कुएं, सिंचाई व्यवस्था और ग्रामीण बुनियादी ढांचे का निर्माण किया जाता है।
-
ग्रामीण महिलाएं और पुरुष दोनों इसमें काम कर सकते हैं।
2. यूपी में महिलाओं की भागीदारी – नया रिकॉर्ड
ताज़ा आंकड़ों के अनुसार:
-
इस वित्तीय वर्ष में महिलाओं की भागीदारी 42.31% दर्ज की गई।
-
पिछले वर्षों की तुलना में यह सबसे ऊंचा स्तर है।
-
यूपी जैसे राज्य में जहां परंपरागत रूप से पुरुषों की भागीदारी ज़्यादा रही है, वहां यह बदलाव उल्लेखनीय है।
3. महिलाओं की बढ़ती भागीदारी के पीछे कारण
यह बदलाव यूं ही नहीं आया। इसके पीछे कई सामाजिक, आर्थिक और सरकारी पहल की भूमिका है।
(i) आत्मनिर्भर भारत अभियान
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू की गई योजनाओं ने ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने की दिशा में प्रोत्साहित किया।
(ii) महिला स्वयं सहायता समूह (SHGs)
यूपी में महिला स्वयं सहायता समूहों का दायरा बढ़ा है। इन समूहों ने महिलाओं को न केवल वित्तीय सहयोग दिया बल्कि रोजगार की ओर भी प्रेरित किया।
(iii) सरकारी प्रयास
-
महिला भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए पंचायत स्तर पर विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम।
-
मनरेगा मजदूरी का सीधा भुगतान महिलाओं के बैंक खातों में।
-
सुरक्षित और सहयोगी कार्यस्थल सुनिश्चित करना।
(iv) सामाजिक सोच में बदलाव
आज के समय में ग्रामीण समाज में भी यह स्वीकार्यता बढ़ रही है कि महिलाएं केवल घरेलू कार्य तक सीमित नहीं, बल्कि वे परिवार की आर्थिक नींव को भी मज़बूत कर सकती हैं।
4. महिलाओं के लिए MNREGS का महत्व
(i) आर्थिक आज़ादी
महिलाओं को सीधे बैंक खाते में मजदूरी मिलने से वे आर्थिक रूप से स्वतंत्र हो रही हैं। अब उन्हें अपनी कमाई को खर्च करने और बचाने का अधिकार मिल रहा है।
(ii) आत्मविश्वास और पहचान
गांव की महिलाएं जब परिवार की आय में योगदान देने लगती हैं, तो उनका सामाजिक सम्मान भी बढ़ता है।
(iii) बेहतर जीवनशैली
कमाई का उपयोग शिक्षा, स्वास्थ्य और बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करने में किया जा रहा है।
(iv) पलायन पर रोक
महिलाएं स्थानीय स्तर पर ही काम करके अपने परिवार का सहयोग कर पा रही हैं। इससे बड़े पैमाने पर पुरुष पलायन को भी संतुलित करने में मदद मिल रही है।
5. चुनौतियाँ अभी भी बरकरार
हालांकि 42% भागीदारी एक सकारात्मक संकेत है, लेकिन कुछ चुनौतियाँ अब भी बनी हुई हैं।
-
मजदूरी भुगतान में देरी – कई बार समय पर भुगतान न होने से महिलाओं को दिक्कत होती है।
-
सुरक्षा – ग्रामीण इलाकों में महिलाओं को सुरक्षित माहौल की ज़रूरत है।
-
तकनीकी जागरूकता – ऑनलाइन भुगतान और जॉब कार्ड अपडेट जैसी प्रक्रियाओं में महिलाएं अभी पीछे हैं।
-
पितृसत्तात्मक सोच – कई जगह अब भी महिलाओं को काम करने के लिए सामाजिक प्रतिरोध झेलना पड़ता है।
6. सफलता की कहानियाँ
(i) ललितपुर की कहानी
ललितपुर जिले की एक महिला सरोज देवी बताती हैं कि मनरेगा से मिली कमाई से उन्होंने अपनी बेटी की पढ़ाई के लिए किताबें खरीदीं और घर में शौचालय बनवाया।
(ii) गोंडा की महिलाएं
गोंडा जिले में महिला समूहों ने MNREGS से जुड़कर तालाब खुदवाए और अपने गांव में जल संकट को हल किया। इससे उन्हें रोजगार और गांव को स्थायी सुविधा दोनों मिली।
7. भविष्य की संभावनाएं
-
महिलाओं की भागीदारी 50% तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा जा सकता है।
-
MNREGS को महिला उद्यमिता से जोड़कर छोटे व्यवसायों में भी अवसर दिए जा सकते हैं।
-
बच्चों की देखभाल केंद्र (Creche) और सुरक्षित कार्यस्थल की व्यवस्था महिलाओं की उपस्थिति और भी बढ़ा सकती है।
UP MNREGS में महिलाओं की भागीदारी 42% तक पहुंचना केवल एक आंकड़ा नहीं, बल्कि यह ग्रामीण समाज की बदलती सोच और महिलाओं की आर्थिक मजबूती का प्रमाण है। यह बदलाव आने वाले समय में न केवल उत्तर प्रदेश बल्कि पूरे देश के लिए प्रेरणा है।
सरकार, समाज और महिलाओं के सामूहिक प्रयास से यह भागीदारी और भी बढ़ सकती है और “आत्मनिर्भर भारत” का सपना साकार हो सकता है।


