स्कंदमाता पूजा विधि 2025: नवरात्रि के 5 पर मां स्कंदमाता को कैसे करें आराधना

सलोनी तिवारी : नवरात्रि के नौ दिनों में देवी दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है, और हर दिन एक विशिष्ट शक्ति और संदेश को दर्शाता है। पाँचवे दिन की आराधना मां स्कंदमाता को समर्पित होती है — वे भगवान कार्तिकेय (स्कंद) की माता हैं। उनका स्वरूप और आशीर्वाद भक्तों को बुद्धि, विवेक और संतान सुख प्रदान करने का माना जाता है।

यह लेख स्कंदमाता की पूजा विधि, कथा, शुभ रंग, मंत्र, भोग और महत्व के साथ-साथ उस विश्वास और भक्ति की गहराई को उजागर करेगा, जो इस विशेष दिन भक्तों की आत्मा में जागृत होती है।


1. स्कंदमाता कौन हैं? (Who is Skandamata)

  • स्कंदमाता नाम “स्कंद + माता” से बना है — अर्थात् माता स्कंद (कार्तिकेय) की।

  • वे नवदुर्गा की पाँचवी स्वरूप हैं।

  • उनकी छवि आमतौर पर कमल पर बैठी दिखाई जाती है, जिसमें वे एक हाथ में कमल धारण करती हैं और अपने lap (गोदी) में शिशु कार्तिकेय को धारण करती हैं।

  • वे चार भुजाएँ लिए होती हैं — एक हाथ अभय मुद्रा में, एक हाथ वरदान मुद्रा में, और अन्य दो हाथों में कमल आदि होते हैं।

  • उनका वाहन सिंह है, जो माता की शक्ति, साहस और दृढता को प्रतीकात्मक रूप से दर्शाता है।


2. कथा / पौराणिक पृष्ठभूमि (Legend / Mythology)

  • उस समय जब दानव तारकासुर को ऐसा वरदान मिला कि केवल भगवान शिव का पुत्र ही उसे मार सकता है, तब देवताओं को चिंता हुई।

  • तभी माँ पार्वती ने तपस्या कर भगवान शिव से विवाह किया और माता बने। उनकी गोद से भगवान कार्तिकेय को जन्म हुआ और उन्होंने तारकासुर का वध किया। इसके बाद देवी के इस स्वरूप को स्कंदमाता के नाम से पूजा जाने लगा।

  • इस प्रकार, स्कंदमाता वह देवी हैं जिन्होंने संतान और रक्षा दोनों स्वरूपों का एकीकृत रूप लिया।


3. पूजा विधि (Puja Vidhi)

नीचे चरणबद्ध पूजा विधि है, जिसे भक्त श्रद्धा और शुद्ध मन से कर सकते हैं:

क्रम विधि / विवरण
1. स्नान एवं शुद्धि प्रातः जल्दी स्नान करें, स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
2. पूजा स्थान की तैयारी पूजा स्थल को स्वच्छ करें, एक पोथी या कपड़े पर देवी की प्रतिमा / चित्र स्थापित करें।
3. कलश स्थापना (Optional) कलश में जल, आम पत्तियाँ और नारियल रखकर पूजा करें।
4. दीपक एवं धूप दीपक जलाएं और धूप/अगरबत्ती से वातावरण पवित्र करें।
5. पुष्प, अक्षत अर्पण ताजे फूल (कमल, गुलाब आदि) और अक्षत अर्पित करें।
6. भोग अर्पण आमतौर पर केला (banana) स्कंदमाता का प्रचलित भोग है। साथ ही अन्य फलों और मिठाइयों का अर्पण किया जाता है।
7. मंत्र जाप प्रमुख मन्त्र:
ॐ देवी स्कंदमातायै नमः

अन्य मन्त्रों में:

Simhasanagata Nityam Padmanchita Karadvaya,
Shubhadastu Sada Devi Skandamata Yashasvini

| 8. स्तुति व पाठ | Durga Saptashati या अन्य देवी स्तुतियाँ पढ़ी जाएँ।
| 9. आरती और समापन | आरती करें, प्रसाद वितरण करें और माता को धन्यवाद कहें। |

नोट: विभिन्न परंपराओं में पंचोपचार विधि (5 प्रकार की अर्पण सामग्री) का पालन भी किया जाता है। Astro Swami G+2Rudraksha Ratna+2


4. शुभ रंग, भोग और अन्य विशेषताएँ

  • रंग: 2025 में स्कंदमाता दिवस के लिए हरा (Green) रंग प्रचलित है।

  • भोग: केला (banana) विशेष रूप से प्रिय माना जाता है; साथ में सरल मिठाइयाँ और अन्य फल अर्पित किए जाते हैं।

  • श्रृंगार: पुष्प, कुंकुम, हल्दी, अक्षत से सजावट की जाती है।

  • उपवास: कुछ भक्त उपवास रखते हैं या फलाहार करते हैं।

  • विशेष उपाय: संतान की इच्छा रखने वालों को छोटी लड़कियों को भोजन व वस्त्र देने की परंपरा है।


5. महत्व और लाभ (Significance & Benefits)

  • स्कंदमाता की पूजा से बुद्धि और विवेक की प्राप्ति होती है।

  • संतान सुख की कामना रखने वाले भक्तों को विशेष कृपा होती है।

  • जीवन की बाधाएँ कम होती हैं, मानसिक शांति मिलती है।

  • भक्त दोनों — माता और पुत्र (मां + कार्तिकेय) — की कृपा पाने का सौभाग्य पाते हैं।


6. सावधानियाँ एवं सुझाव

  • पूजा करते समय अशुद्ध मन, उत्तेजना या द्वेष नहीं होना चाहिए।

  • अन्न-जल (भोजन) को शुद्ध सामग्री से बनाएं।

  • रात बहुत देर तक पूजा न करें — समयबद्ध समापन करें।

  • स्थानीय परंपराओं का सम्मान करें और विद्वानों की सलाह लें।

डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं पर आधारित है। अंशिका मीडिया किसी भी प्रकार की पुष्टि नहीं करता। किसी भी मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें।

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