सलोनी तिवारी: उत्तर प्रदेश सरकार ने सड़कों पर बढ़ते हादसों को रोकने और लोगों को सुरक्षित यात्रा का भरोसा दिलाने के लिए ‘सड़क सुरक्षा साथी योजना’ शुरू करने का प्रस्ताव रखा है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य राज्य में रोड एक्सीडेंट्स को 50% तक कम करना है।
वालंटियर्स की भूमिका
इस योजना के अंतर्गत हर तहसील में प्रशिक्षित वालंटियर्स तैनात होंगे। इन्हें ‘सड़क सुरक्षा साथी’ कहा जाएगा। इनकी जिम्मेदारियां होंगी:
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पैदल यात्रियों को सुरक्षित सड़क पार कराने में मदद करना।
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स्कूल ज़ोन के बाहर निगरानी रखना ताकि बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
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हेलमेट और सीटबेल्ट काउंसलिंग करना, ताकि लोग नियमों का पालन करें।
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ट्रैफिक पुलिस की मदद से यातायात को नियंत्रित करना।
जागरूकता अभियान
वालंटियर्स सिर्फ निगरानी ही नहीं करेंगे, बल्कि वे लोगों को जागरूक भी करेंगे। सड़क पर चलते समय मोबाइल का इस्तेमाल न करना, तेज़ रफ्तार से बचना, शराब पीकर गाड़ी न चलाना जैसे संदेश लगातार दिए जाएंगे।
क्यों ज़रूरी है यह पहल?
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों के अनुसार, भारत में हर साल लगभग 1.5 लाख लोग सड़क हादसों में अपनी जान गंवाते हैं। यूपी जैसे बड़े राज्य में यह संख्या और भी अधिक है। ऐसे में, सड़क सुरक्षा साथी जैसी पहल से जमीनी स्तर पर लोगों के व्यवहार में बदलाव लाने की कोशिश की जाएगी।
सरकार की रणनीति
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2027 तक रोड एक्सीडेंट्स में 50% की कमी।
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ट्रैफिक नियमों का सख़्ती से पालन।
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जागरूकता + निगरानी का संयुक्त मॉडल।
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ग्रामीण और शहरी दोनों इलाकों में वॉलंटियर्स की तैनाती।
संभावित प्रभाव
यदि योजना सफल होती है, तो:
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यूपी में सड़क हादसों की संख्या में भारी गिरावट आएगी।
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बच्चों और पैदल यात्रियों की सुरक्षा बढ़ेगी।
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हेलमेट और सीटबेल्ट का इस्तेमाल सामान्य आदत बन जाएगा।
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ट्रैफिक व्यवस्था और भी मज़बूत होगी।
सड़क हादसे में मदद करने वालों के लिए बड़ा इनाम: ‘राह-वीर योजना’ के तहत मिलेगा 25,000 रुपये

