सलोनी तिवारी: भारत की सांस्कृतिक राजधानी कहे जाने वाले कोलकाता में इस सितंबर एक बेहद खास आयोजन होने जा रहा है। रामकृष्ण मिशन संस्कृति संस्थान द्वारा आयोजित “महामाया” नामक यह विशेष प्रदर्शनी 18 से 20 सितंबर 2025 तक चलेगी। यह प्रदर्शनी सिर्फ कला प्रेमियों के लिए ही नहीं बल्कि उन सभी लोगों के लिए खास है, जो भारतीय परंपरा और देवी दुर्गा की सांस्कृतिक विरासत को नए नजरिए से देखना चाहते हैं।
माँ दुर्गा की सांस्कृतिक धरोहर
“महामाया” प्रदर्शनी का मुख्य आकर्षण माँ दुर्गा की मूर्तियों, पेंटिंग्स और समकालीन कलाकृतियों के ज़रिए उनकी आध्यात्मिक शक्ति और सांस्कृतिक महत्व को उजागर करना है।
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इसमें पारंपरिक बंगाली शिल्पकला से लेकर आधुनिक आर्ट इंस्टॉलेशंस शामिल होंगे।
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कला के ज़रिए यह बताया जाएगा कि कैसे माँ दुर्गा सिर्फ शक्ति का प्रतीक नहीं बल्कि नारी सामर्थ्य और सामाजिक संतुलन का भी प्रतीक हैं।
प्रदर्शनी की खास बातें
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आर्ट इंस्टॉलेशंस: आधुनिक और पारंपरिक दोनों शैलियों में बनी कलाकृतियाँ।
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पेंटिंग्स और फोटोग्राफी: माँ दुर्गा की पूजा और पंडाल संस्कृति की झलक।
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सांस्कृतिक परफॉर्मेंस: लोकनृत्य, संगीत और शास्त्रीय प्रस्तुतियाँ।
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वर्कशॉप्स और लेक्चर: कला प्रेमियों और छात्रों के लिए विशेष सत्र।
आधुनिकता और परंपरा का संगम
इस प्रदर्शनी की खासियत यह है कि यह अतीत और वर्तमान को जोड़ती है। एक तरफ कुम्हारपाड़ा के कारीगरों द्वारा बनाई गई पारंपरिक प्रतिमाएँ होंगी, तो दूसरी ओर नई पीढ़ी के आर्टिस्ट्स द्वारा प्रस्तुत डिजिटल आर्ट और मल्टीमीडिया इंस्टॉलेशन भी दर्शकों को आकर्षित करेंगे।
क्यों खास है यह प्रदर्शनी?
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दुर्गा पूजा केवल एक धार्मिक पर्व नहीं बल्कि पश्चिम बंगाल की सांस्कृतिक आत्मा है।
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“महामाया” के ज़रिए लोगों को यह समझने का अवसर मिलेगा कि कैसे यह परंपरा आधुनिक समय में भी प्रासंगिक है।
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यह आयोजन भारत की Intangible Cultural Heritage को वैश्विक स्तर पर सामने लाने की दिशा में भी एक कदम है।
आयोजन स्थल और तिथियाँ
स्थान: रामकृष्ण मिशन संस्कृति संस्थान, कोलकाता
तारीख: 18–20 सितंबर 2025

