सलोनी तिवारी: उत्तर प्रदेश सरकार शिक्षा क्षेत्र को नई ऊँचाइयों पर ले जाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। इसी क्रम में अब सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। SCERT (स्टेट काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग) और IIT कानपुर के सहयोग से राज्य के स्कूलों के शिक्षकों को AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस), कोडिंग, कंप्यूटेशनल थिंकिंग और डिजिटल साक्षरता की ट्रेनिंग दी जाएगी। इस योजना का सीधा लाभ लगभग 75 लाख छात्रों तक पहुँचेगा।
क्यों है यह पहल ज़रूरी?
आज का दौर तकनीक और डिजिटल दुनिया का है। बच्चों को भविष्य के अनुरूप शिक्षित करने के लिए सिर्फ पारंपरिक शिक्षा पर्याप्त नहीं है। AI, मशीन लर्निंग, कोडिंग जैसी स्किल्स आने वाले समय में हर क्षेत्र में ज़रूरी होंगी। अगर शिक्षक खुद इन विषयों में निपुण होंगे तो वे बच्चों को भी आधुनिक शिक्षा दे सकेंगे।
UP सरकार का मानना है कि डिजिटल शिक्षा ही आने वाले समय में छात्रों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने योग्य बनाएगी।
ट्रेनिंग का फोकस
इस ट्रेनिंग प्रोग्राम में शिक्षकों को सिर्फ तकनीकी जानकारी ही नहीं दी जाएगी, बल्कि उन्हें यह भी सिखाया जाएगा कि कैसे:
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AI आधारित टूल्स का इस्तेमाल शिक्षण प्रक्रिया में किया जाए।
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कोडिंग और प्रोग्रामिंग को सरल भाषा में बच्चों तक पहुँचाया जाए।
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कंप्यूटेशनल थिंकिंग से बच्चों की समस्या-समाधान क्षमता विकसित की जाए।
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डिजिटल साक्षरता से बच्चों को इंटरनेट का सुरक्षित और सकारात्मक उपयोग सिखाया जाए।
750 शिक्षक बनेंगे मास्टर ट्रेनर्स
शुरुआत में 750 शिक्षकों को ट्रेनिंग दी जाएगी। ये शिक्षक बाद में अपने-अपने जिलों में अन्य शिक्षकों को प्रशिक्षित करेंगे। इस तरह से यह पहल धीरे-धीरे पूरे प्रदेश में फैल जाएगी और लाखों छात्र-छात्राओं को इसका लाभ मिलेगा।
75 लाख छात्रों को होगा फायदा
अनुमान है कि इस कार्यक्रम से सीधे तौर पर 75 लाख बच्चे लाभान्वित होंगे। ये बच्चे न सिर्फ किताबों की पढ़ाई करेंगे बल्कि टेक्नोलॉजी-फ्रेंडली भी बनेंगे। इससे उनकी क्रिएटिविटी, समस्या सुलझाने की क्षमता और भविष्य की नौकरी के अवसर भी बढ़ेंगे।
IIT कानपुर की भूमिका
IIT कानपुर लंबे समय से देश में टेक्नोलॉजी और शिक्षा क्षेत्र में नई दिशा देने का काम करता रहा है। इस प्रोग्राम में IIT कानपुर शिक्षकों को प्रशिक्षित करने के लिए स्पेशल ट्रेनिंग मॉड्यूल तैयार कर रहा है। साथ ही, AI और कोडिंग जैसे विषयों को सरल और रोचक तरीके से सिखाने के लिए डिजिटल कंटेंट और वर्कशॉप्स आयोजित की जाएंगी।
शिक्षा जगत पर असर
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आधुनिक शिक्षा का प्रसार – ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के छात्रों को समान अवसर मिलेंगे।
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रोजगार के अवसर – बच्चों को टेक्नोलॉजी-आधारित स्किल्स मिलने से उनकी रोजगार क्षमता बढ़ेगी।
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शिक्षकों का विकास – ट्रेनिंग से शिक्षक खुद भी डिजिटल युग के लिए तैयार होंगे।
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UP को एजुकेशन हब बनाने का कदम – यह पहल उत्तर प्रदेश को शिक्षा क्षेत्र में अग्रणी राज्यों में शामिल कर सकती है।
विशेषज्ञों की राय
शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यह पहल एक गेम-चेंजर साबित हो सकती है। यदि शिक्षक सही तरीके से प्रशिक्षित होते हैं, तो आने वाले 5-10 सालों में UP के बच्चे न सिर्फ राष्ट्रीय बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी तकनीकी स्किल्स में आगे होंगे।
सरकार की बड़ी पहलें पहले भी
इससे पहले UP सरकार ने डिजिटल लाइब्रेरी, स्मार्ट क्लासेज़ और स्कूलों में टैबलेट व लैपटॉप वितरण जैसी योजनाएँ शुरू की थीं। अब यह नया कदम उस दिशा में एक और महत्वपूर्ण पहल है।
कुल मिलाकर, SCERT और IIT कानपुर के सहयोग से शुरू की गई यह योजना UP के शिक्षा क्षेत्र को एक नई दिशा देगी। यह सिर्फ शिक्षकों का विकास नहीं है, बल्कि बच्चों के लिए भविष्य सुरक्षित और अवसरों से भरपूर बनाने का प्रयास है।

