सलोनी तिवारी: रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद यूरोप ने रूस पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाए। लेकिन भारत ने अपने ऊर्जा हितों को प्राथमिकता देते हुए रूस से सस्ते कच्चे तेल की खरीद जारी रखी।
ट्रंप प्रशासन का दबाव
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने भारत पर 50% टैरिफ दबाव बनाने की कोशिश की। अमेरिका चाहता था कि भारत रूस से तेल खरीद कम करे और वैकल्पिक स्रोतों से आपूर्ति ले।
सीतारमण का दो टूक जवाब
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्पष्ट कहा:
“भारत अपनी ज़रूरतों के अनुसार फैसला करेगा कि तेल कहां से और किस दर पर खरीदा जाए।”
उन्होंने यह भी बताया कि रूस से सस्ते तेल की खरीद से भारत ने अरबों डॉलर की विदेशी मुद्रा बचाई है।
क्यों ज़रूरी है रूस से तेल खरीद?
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आर्थिक मजबूरी – कच्चे तेल के आयात पर भारत की विदेशी मुद्रा खर्च होती है।
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राहत उपभोक्ताओं को – सस्ता तेल मिलने से पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर नियंत्रण रहता है।
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रणनीतिक संतुलन – भारत पश्चिमी देशों और रूस दोनों से संबंध बनाए रखते हुए अपनी ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करता है।
GST सुधारों से संतुलन
सीतारमण ने कहा कि सरकार GST सुधारों और अन्य आर्थिक उपायों से अमेरिकी टैरिफ के असर को संतुलित करने की कोशिश कर रही है।
भारत का यह कदम दर्शाता है कि वह वैश्विक दबाव के बावजूद अपनी ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक मजबूती को प्राथमिकता दे रहा है।

