सलोनी तिवारी: भारत रूफटॉप सोलर क्षमता 2025 में एक नई ऊँचाई पर पहुँचा है। Mercom द्वारा जारी ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने 2025 की पहली छमाही (H1 2025) में 2.8 गीगावाट रूफटॉप सोलर क्षमता स्थापित की है। यह उपलब्धि भारत को अक्षय ऊर्जा और सतत विकास की दिशा में एक मज़बूत कदम दिलाती है।
Mercom की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने 2025 की पहली छमाही (H1 2025) में 2.8 गीगावाट (GW) रूफटॉप सोलर क्षमता स्थापित की। यह देश की बढ़ती ऊर्जा आवश्यकताओं को स्वच्छ और टिकाऊ तरीके से पूरा करने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि है।
भारत पहले से ही अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर तेजी से उभर रहा है। रूफटॉप सोलर पॉवर को बढ़ावा देने के पीछे कई कारण हैं—जैसे बढ़ती बिजली की मांग, पर्यावरण प्रदूषण को कम करना, और आम नागरिकों को बिजली बिलों में राहत देना।
विशेषज्ञों के अनुसार, 2025 की शुरुआत से अब तक सरकार और निजी क्षेत्र द्वारा कई प्रोत्साहन योजनाएँ लाई गईं, जिनमें सब्सिडी, आसान लोन और सोलर रूफटॉप मिशन शामिल हैं। यही वजह है कि भारत में रूफटॉप सोलर की स्थापना में तेज़ी देखी जा रही है।
रूफटॉप सोलर क्यों है अहम?
भारत जैसे विकासशील देश में बिजली की बढ़ती मांग और पर्यावरण प्रदूषण की चुनौती को देखते हुए, रूफटॉप सोलर पॉवर एक बेहतर विकल्प है। यह न सिर्फ कार्बन उत्सर्जन को कम करता है बल्कि आम नागरिकों को बिजली बिल में भी राहत देता है।
2025 की उपलब्धि के मुख्य कारण
-
सरकारी योजनाएँ और सब्सिडी – प्रधानमंत्री सोलर रूफटॉप योजना जैसी पहलें लोगों को सोलर अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर रही हैं।
-
निजी निवेश और स्टार्टअप्स – एनर्जी सेक्टर में निवेश बढ़ने से प्रोजेक्ट्स तेज़ी से पूरे हो रहे हैं।
-
तकनीकी उन्नति – सस्ते और टिकाऊ सोलर पैनल्स उपलब्ध हो रहे हैं।
भारत के लिए फायदे
-
ऊर्जा आत्मनिर्भरता – भारत आयातित ईंधन पर निर्भरता घटा रहा है।
-
रोजगार सृजन – सोलर प्रोजेक्ट्स नए रोजगार के अवसर पैदा कर रहे हैं।
-
500 GW लक्ष्य की ओर कदम – सरकार का लक्ष्य है कि 2030 तक 500 गीगावाट अक्षय ऊर्जा क्षमता हासिल की जाए।
भारत की रूफटॉप सोलर क्षमता 2025 में 2.8 GW की यह उपलब्धि न सिर्फ एक आँकड़ा है बल्कि भविष्य की दिशा भी तय करती है। यह स्पष्ट करता है कि भारत सतत ऊर्जा के क्षेत्र में दुनिया के अग्रणी देशों में शामिल होने की राह पर है।

