साहित्यकार सहयोग संगठन ने उरई की वरिष्ठ साहित्यकारा डॉ. माया सिंह माया और शिक्षाविद् डॉ. लक्ष्मीकांत पांडेय का किया सम्मान

कानपुर। साहित्यकार सहयोग संगठन द्वारा आयोजित विशेष सम्मान समारोह में उरई से आई वरिष्ठ साहित्यकारा डॉ. माया सिंह माया और शिक्षाविद् डॉ. लक्ष्मीकांत पांडेय को सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम की शुरुआत माँ शारदे के पूजन एवं दीप प्रज्ज्वलन से हुई। मुख्य अतिथि के रूप में गोविंद नगर विधायक श्री सुरेंद्र मैथानी तथा पूर्व विधायक श्री रघुनन्दन सिंह भदौरिया मौजूद रहे। संगठन की पहल “अपने से वरिष्ठ को समय दें” के अंतर्गत दोनों विशिष्ट अतिथियों को माल्यार्पण, पुष्पगुच्छ एवं सम्मान पत्र भेंटकर सम्मानित किया गया।

संगठन की संयोजक डॉ. सुषमा सेंगर और अध्यक्ष डॉ. गायत्री सिंह के नेतृत्व में उपस्थित सभी लोगों ने भगवान भोलेनाथ बाबा के मूल स्थान कैलाश मानसरोवर की मुक्ति, तिब्बत की आज़ादी, भारत की सुरक्षा, चीनी वस्तुओं का बहिष्कार, स्वदेशी का आह्वान और हर हाथ में काम की शपथ ली।
इस दौरान डॉ. माया सिंह माया ने सभी को संकल्प दिलाते हुए कहा कि – “हम सब मिलकर मानसरोवर की आज़ादी और चीन से मुक्ति के लिए एकजुट हों।”
वहीं अध्यक्ष डॉ. लक्ष्मीकांत पांडेय ने कहा – “पहले साहित्य राजनीति के पास जाता था, लेकिन आज राजनीति साहित्य के पास आई है, यह बहुत बड़ी उपलब्धि है।”

विधायक सुरेंद्र मैथानी ने कहा कि साहित्यकार सहयोग संगठन ने जो बीड़ा उठाया है उसमें वे हर संभव सहयोग करेंगे। पूर्व विधायक रघुनन्दन सिंह भदौरिया ने संगठन द्वारा भारत-तिब्बत समन्वय संघ के गठन और कार्यों की सराहना करते हुए पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया।

कार्यक्रम में आए साहित्यकारों ने काव्यपाठ प्रस्तुत किया। तत्पश्चात भाजपा महिला मोर्चा प्रदेश मंत्री डॉ. विजया तिवारी की अध्यक्षता में महिलाओं की अंताक्षरी प्रतियोगिता का आयोजन हुआ।

हेल्पिंग हैंड्स के संस्थापक आदित्य पोद्दार ने कहा कि समाज और साहित्य के लिए जहाँ भी ज़रूरत होगी, उनका संगठन सहयोग करता रहेगा।

इस अवसर पर प्रमुख साहित्यकार और समाजसेवी मौजूद रहे जिनमें –
डॉ. राधा शाक्य मधु मोहिल, रीता सिंह, उमा विश्वकर्मा, श्री हरि वाणी, अशोक बाजपेई, मुरली सिंह परिहार, श्री श्याम सुंदर निगम, वरिष्ठ अधिवक्ता कौशल शर्मा, डॉ. माहेतलत सिद्दीकी, डॉ. कनक लता गौर, मिनी सिंह, डॉ. रेखा सिंह, कामिनी सिंह, मनीषा राजावत और कविता सिंह शामिल रहे।

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