दिसंबर 2025 में भारत दौरे पर आएंगे रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन

सलोनी तिवारी: क्रेमलिन ने शुक्रवार को आधिकारिक रूप से पुष्टि की कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (Vladimir Putin) दिसंबर 2025 में भारत का दौरा करेंगे। यह यात्रा भारत और रूस के बीच दशकों पुराने रणनीतिक और आर्थिक संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में एक अहम पड़ाव मानी जा रही है।

भारत-रूस संबंधों में नया अध्याय

भारत और रूस का रिश्ता शीतयुद्ध के समय से ही विशेष रहा है। रूस ने भारत के रक्षा, अंतरिक्ष और ऊर्जा क्षेत्रों में लगातार सहयोग किया है। पुतिन की यह यात्रा ऐसे समय हो रही है जब वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक समीकरण बदल रहे हैं और भारत दोनों महाशक्तियों—अमेरिका और रूस—के बीच संतुलन बनाए रखने की कोशिश कर रहा है।

प्रमुख एजेंडा

इस दौरे के दौरान कई अहम मुद्दों पर बातचीत होने की संभावना है:

  1. रक्षा सहयोग – भारत और रूस पहले से ही कई रक्षा समझौतों से जुड़े हैं। पुतिन की यात्रा के दौरान एस-400 मिसाइल सिस्टम, पनडुब्बी परियोजना और भविष्य के रक्षा सौदों पर चर्चा होने की उम्मीद है।

  2. ऊर्जा साझेदारी – रूस भारत के लिए तेल और गैस का एक बड़ा स्रोत बन चुका है। कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति को लेकर नई रणनीतियाँ बनाई जा सकती हैं।

  3. अंतरिक्ष कार्यक्रम – भारत के गगनयान मिशन और रूस के स्पेस टेक्नोलॉजी में सहयोग को और गहरा करने की संभावना है।

  4. व्यापार और निवेश – दोनों देशों ने 2025 तक द्विपक्षीय व्यापार को 100 बिलियन डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य रखा है। पुतिन का दौरा इस दिशा में एक ठोस कदम हो सकता है।

  5. भू-राजनीति और वैश्विक चुनौतियाँ – यूक्रेन संकट, एशिया में चीन की बढ़ती भूमिका और पश्चिमी देशों की नीतियों पर भी भारत और रूस के बीच उच्च-स्तरीय वार्ता हो सकती है।

सामरिक महत्व

विशेषज्ञों का मानना है कि पुतिन का भारत दौरा न केवल भारत-रूस संबंधों को नई ऊर्जा देगा बल्कि यह एशिया और यूरोप की भू-राजनीति में भी एक मजबूत संदेश होगा। भारत अपनी “मल्टी-अलाइनमेंट” नीति के तहत अमेरिका, यूरोप और रूस तीनों के साथ संबंधों को संतुलित रखने का प्रयास कर रहा है।

ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य

व्लादिमीर पुतिन कई बार भारत का दौरा कर चुके हैं और हर बार दोनों देशों के बीच नई साझेदारियाँ बनी हैं। पिछली यात्रा 2021 में हुई थी, जब दोनों देशों ने 21वें वार्षिक शिखर सम्मेलन में रक्षा और ऊर्जा सहयोग से जुड़े बड़े समझौतों पर हस्ताक्षर किए थे।

दिसंबर 2025 का यह दौरा भारत-रूस संबंधों को नई दिशा देने वाला साबित हो सकता है। यह न केवल रणनीतिक साझेदारी को गहरा करेगा बल्कि व्यापार, रक्षा और ऊर्जा क्षेत्रों में भी ठोस परिणाम लाएगा। दुनिया की बदलती राजनीति के बीच यह मुलाकात भारत की कूटनीतिक संतुलन नीति को भी और मजबूत करेगी।

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