मिशन सुदर्शन चक्र: 2026 में M1 इंटरसेप्टर मिसाइल का परीक्षण शुरू, 2035 तक देशव्यापी रक्षा कवच का लक्ष्य

सलोनी तिवारी:

नई दिल्ली, 28 अगस्त 2025:
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा अगस्त माह में घोषित मिशन सुदर्शन चक्र (Mission Sudarshan Chakra) के तहत भारत अपनी बहु-स्तरीय वायु और मिसाइल रक्षा प्रणाली विकसित करने जा रहा है। इसके लिए प्रोजेक्ट कुशा (Project Kusha) नामक एक प्रमुख उप-परियोजना के अंतर्गत 2026 में M1 इंटरसेप्टर मिसाइल का परीक्षण शुरू करने की योजना है।

अंतरराष्ट्रीय तुलनात्मक प्रणाली

यह प्रणाली रूस के S-400 और इजरायल के Iron Dome जैसी वैश्विक हाईटेक एयर डिफेंस तकनीकों के समकक्ष होगी। इसका उद्देश्य रणनीतिक एवं नागरिक क्षेत्रों की व्यापक रक्षा कवच प्रदान करना है।Project Kusha – इंटरसेप्टर मिसाइल की श्रेणियाँ

  • M1 (150 किमी रेंज): परीक्षण 2026 में

  • M2 (250 किमी रेंज): 2027

  • M3 (350 किमी रेंज): 2028
    DRDO की योजना है कि 2028 तक ये सभी विकसित हो जाएं और 2030 से इन्हें सक्रिय रूप से प्रायोगिक और परिचालन उपयोग के लिए तैयार किया जाए।

मल्टी-लेयर संरचना और तकनीकी एकीकरण

यह प्रणाली एकीकृत एयर डिफेंस वेपन सिस्टम (IADWS) के साथ जुड़कर काम करेगी, जिसमें QRSAM, VSHORADS, और Directed Energy Weapon के संयोजन से ट्रॉय संयंत्र बनाए जाएंगे। हाल ही में इसे DRDO ने सफलतापूर्वक परीक्षण किया।

दीर्घकालीन लक्ष्य

मिशन सुदर्शन चक्र का उद्देश्य 2035 तक भारत की रक्षा संरचना को एक शक्तिशाली कवच के रूप में स्थापित करना है, जो विमान, मिसाइल, ड्रोन और अन्य आधुनिक हवाई खतरों को प्रभावी रूप से रोक सके।

Mission Sudarshan Chakra आधुनिक वायु रक्षा की दिशा में भारत का महत्वाकांक्षी कदम है। इस प्रणाली का निर्माण देश को आत्मनिर्भर रक्षा तकनीक की ओर अग्रसर कर रहा है, जिससे न केवल सुरक्षा अधिक मजबूत होगी बल्कि आत्म-गौरव भी बढ़ेगा।

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