सलोनी तिवारी: उत्तर प्रदेश वन विभाग ने बाघ संरक्षण को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए अपनी वर्तमान टाइगर कंजरवेशन प्लान (Tiger Conservation Plan) में संशोधन करने का प्रस्ताव रखा है। इस संशोधन का मुख्य उद्देश्य जंगल की सीमाओं पर चेन-लिंक फेंसिंग की अनुमति देना है।
वन विभाग का मानना है कि यह कदम बाघों और स्थानीय समुदायों के बीच होने वाले संघर्ष को कम करेगा। फेंसिंग के माध्यम से न केवल बाघों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी बल्कि आसपास के गांवों और मानव बस्तियों में भी संभावित खतरों को कम किया जा सकेगा।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह की पहल से वन्यजीव संरक्षण में एक नया आयाम जुड़ सकता है। इसके अलावा, यह परियोजना राज्य में बाघों की संख्या और उनके आवास की सुरक्षा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
उत्तर प्रदेश में बाघ संरक्षण पिछले वर्षों में राज्य सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में रहा है। हाल ही में tiger census रिपोर्ट के अनुसार राज्य में बाघों की संख्या में सुधार देखा गया है, और इस संशोधन के लागू होने से सुरक्षा और भी मजबूत होगी।
वन विभाग ने कहा कि प्रस्तावित संशोधन पर शीघ्र ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा और संबंधित स्टेकहोल्डर्स से राय लेने के बाद इसे लागू किया जाएगा।

