रूस का भरोसा: भारत रूसी तेल खरीदता रहेगा, रुपए में भुगतान व्यवस्था पर तेज़ी

सलोनी तिवारी: नई दिल्ली/मॉस्को — रूस ने भारत को भरोसा दिलाया है कि अमेरिकी प्रतिबंधों और बढ़ी हुई कस्टम दरों के बावजूद भारतीय बाज़ार में उसकी तेल आपूर्ति लगातार जारी रहेगी। आज भारत की कुल तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी करीब 35% है, जबकि 2021 में यह केवल 0.2% थी।


क्यों बढ़ रही है रूस से तेल खरीद?

भारत के लिए रूस का तेल सबसे सस्ता विकल्प बन चुका है। रूस भारतीय रिफाइनर्स को 5–7% तक का डिस्काउंट दे रहा है। यही वजह है कि इंडियन ऑयल (IOC) और बीपीसीएल (BPCL) ने सितंबर–अक्टूबर की डिलीवरी के लिए रूसी तेल का नया ऑर्डर दिया है।


रुपए में भुगतान की तैयारी

भारत और रूस मिलकर एक नई भुगतान प्रणाली विकसित कर रहे हैं, जिसमें भारतीय रुपए को रूबल में बदला जाएगा। इस व्यवस्था से डॉलर पर निर्भरता घटेगी और व्यापार ज्यादा सुगम होगा। जानकारों का मानना है कि यह कदम वैश्विक स्तर पर डे-डॉलराइजेशन (De-dollarisation) की दिशा में बड़ी पहल साबित हो सकता है।


रणनीतिक और भू-राजनीतिक पहलू

रूस ने साफ़ किया है कि अमेरिकी टैरिफ का असर भारत-रूस रिश्तों पर नहीं पड़ेगा। रूसी अधिकारियों ने कहा, “अगर भारतीय सामान अमेरिका नहीं जा सकते, तो रूस के लिए दरवाज़े हमेशा खुले हैं।”

इसके साथ ही, भारत-रूस-चीन के बीच संभावित त्रिपक्षीय वार्ता की भी योजना बन रही है। इसे एशियाई सहयोग और “ग्रेटर यूरेशियन पार्टनरशिप” को मज़बूत करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।


निष्कर्ष

भारत और रूस की साझेदारी अब सिर्फ़ ऊर्जा आपूर्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आर्थिक और रणनीतिक स्तर पर भी गहराई से मज़बूत हो रही है। रुपए-रूबल भुगतान व्यवस्था दोनों देशों को अमेरिकी दबाव से बचाएगी और भारत को ऊर्जा सुरक्षा के साथ-साथ आर्थिक स्वतंत्रता भी दिलाएगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *